चाईबासा। बचत खाते से आधी रात में अनधिकृत यूपीआई (UPI) ट्रांजेक्शन के जरिए 48,765 रुपये उड़ाये जाने के मामले में पश्चिमी सिंहभूम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है।
आयोग ने कैनरा बैंक (जैन मार्केट शाखा, चाईबासा) को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए शिकायतकर्ता धनेश कुमार के पक्ष में निर्णय दिया।
बैंक को विवादित राशि वापस री-क्रेडिट करने के साथ-साथ मानसिक प्रताड़ना के लिए 15 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये केस खर्च देने का आदेश दिया गया है। इस प्रकार शिकायतकर्ता को कुल 73,765 रुपये की आर्थिक राहत मिलेगी।
3 अक्टूबर को खाते से गायब हुए थे रुपये
मामले के अनुसार, धनेश कुमार विगत आठ वर्षों से कैनरा बैंक में बचत खाता संचालित कर रहे हैं। 3 अक्टूबर को उनके मोबाइल पर मैसेज आया कि उनके खाते से कई यूपीआई ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 48,765 रुपये निकाल लिए गए हैं।
उन्होंने उसी दिन बैंक शाखा पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई और राशि वापस करने की गुहार लगाई। बैंक के ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम में भी कई बार गुहार लगाने के बावजूद जब पैसे वापस नहीं मिले, तब पीड़ित ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
बैंक ने पेटीएम-गूगल पे का हवाला देकर झाड़ा था पल्ला
कैनरा बैंक की ओर से तर्क दिया गया था कि लेनदेन पेटीएम और गूगल पे जैसे थर्ड पार्टी ऐप से हुए हैं, इसलिए उसकी कोई जवाबदेही नहीं बनती।
नोटिस के बावजूद सुनवाई की निर्धारित तिथि पर बैंक की ओर से कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद 16 मार्च को आयोग ने मामले में बैंक के खिलाफ एकतरफा (Ex-Parte) कार्रवाई का निर्णय लिया।
45 दिनों के भीतर करना होगा भुगतान
आयोग ने सुनवाई के दौरान कहा कि बैंक यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा कि लेनदेन ग्राहक द्वारा ही अधिकृत किए गए थे। बैंक कोई प्रमाणीकरण दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
आयोग ने स्पष्ट किया कि यूपीआई या अन्य डिजिटल माध्यमों से हुए धोखाधड़ी वाले लेनदेन में बैंक अपनी जवाबदेही से पल्ला नहीं झाड़ सकता।
आयोग ने बैंक को आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर पीड़ित के खाते में 48,765 रुपये जमा कराने और मुआवजा व केस खर्च देने का सख्त निर्देश दिया है। समय सीमा के भीतर भुगतान न करने पर 9 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज देना होगा।

