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    Home»देश»जेपी धोखाधड़ी मामले में चार सौ करोड़ की संपत्ति जब्त
    देश

    जेपी धोखाधड़ी मामले में चार सौ करोड़ की संपत्ति जब्त

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comJanuary 8, 2026No Comments7 Views
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    नई दिल्ली 08 जनवरी। प्रवर्तन निदेशालय ने जेपी इंफ्राटेक के पूर्व एमडी मनोज गौड़ से जुड़े एक ट्रस्ट और प्रमुख हाउसिंग ब्रोकरेज फर्म इन्वेस्टर्स क्लिनिक के प्रमोटर हनी कटियाल की कंपनी की 400 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। एजेंसी ने बुधवार को यह जानकारी दी।

    पीएमएलए के प्रावधानों के तहत की गई यह कार्रवाई जेपी समूह की कंपनियों जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड और जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड और उनसे संबंधित संस्थाओं के खिलाफ नोएडा में जेपी विशटाउन और जेपी ग्रीन्स परियोजनाओं के घर खरीदारों से एकत्र किए गए धन में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और दुरुपयोग की जांच से जुड़ी है।

    केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा कि जयप्रकाश सेवा संस्थान और पेज-3 बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड की अचल संपत्तियों को जब्त किया गया है। इनका संयुक्त वर्तमान बाजार मूल्य 400 करोड़ रुपये है। हालांकि, ईडी ने यह नहीं बताया कि दोनों पक्षों में से प्रत्येक के पास कितनी राशि है। ईडी ने दावा किया कि दोनों कंपनियों (जेएसएस और पेज-3 बिल्डटेक) को घर खरीदारों के डायवर्ट किए फंड का ‘कुछ हिस्सा’ मिला था।

    ईडी इस मामले में पहले ही जेपी ग्रुप के मालिक मनोज गौड़ को गिरफ्तार कर चुकी है और फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में जेल में है। ईडी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जेपी ग्रुप ने खुद एनसीएलटी में स्वीकार किया है कि 25 हजार घर खरीददारों से 14,599 करोड़ रुपये जमा किये थे।
    ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में इसमें बड़ी मात्रा में धन के दूसरी कंपनियों में डायवर्ट कर छुपाने के सबूत मिले हैं। इनमें जेपी सेवा संस्था, जेपी हेल्थकेयर, जेपी स्पोट्स इंटरनेशनल प्रमुख हैं।

    मनोज गौड़ खुद जेपी सेवा संस्था को मैनेजिंग ट्रस्टी है। घर खरीददारों से मिली रकम को इसमें डायवर्ट किया गया था। इसी तरह से हनी कात्याल की कंपनी पेज3 बिल्डटेक में भी पैसे ट्रांसफर किये जाने के सबूत मिले हैं। इन्हीं सबूतों के आधार पर ईडी ने जेपी सेवा संस्था और पेज3 बिल्डटेक की 400 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है।
    घर खरीददारों से धोखाधड़ी के आरोप में दिल्ली और उत्तर प्रदेश में जेपी ग्रुप के खिलाफ कई एफआइआर दर्ज हैं। इसे आधार बनाते हुए ईडी ने पिछले साल जेपी ग्रुप के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी।

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