अलीगढ़ 26 जून। यूपी के अलीगढ़ में अपराध और माफिया गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना देहलीगेट पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अभियुक्तों की चल संपत्ति और बैंक खातों में जमा धनराशि को कुर्क कर दिया.
जिला मजिस्ट्रेट के आदेश के अनुपालन में गैंगस्टर अधिनियम की धारा 14(1) के तहत कुल 7,36,842.86 रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त की गई है. टीवीएस शोरूम संचालक अभिषेक गुप्ता हत्याकांड में महामंडलेश्वर अन्नपूर्णा भारती और उनके पति अशोक पांडे पर तीन लाख रुपये की सुपारी देकर हत्या कराने का केश चल रहा है.
पुलिस ने दोनों सूत्रों के अलावा महामंडलेश्वर अन्नपूर्णा भारती और उनके पति अशोक पांडे को गिरफ्तार कर जेल भेजा था. पुलिस ने दावा किया था कि महामंडलेश्वर अन्नपूर्णा भारती के अभिषेक गुप्ता से संबंध थे. दोनों के बीच विवाद के चलते हत्या की साजिश रची गई. जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर दोनों की चल संपत्ति कुर्क की गई है.
पुलिस के अनुसार, कार्रवाई अशोक कुमार पाण्डेय पुत्र केशव दयाल पाण्डेय निवासी बी दास कम्पाउंड, नौरंगाबाद, थाना गांधी पार्क तथा उनकी पत्नी महामण्डलेश्वर अन्नपूर्णा भारती उर्फ पूजा शकुन पाण्डेय के विरुद्ध की गई.
दोनों के खिलाफ पहले से गैंगस्टर अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज है और उन पर विभिन्न आपराधिक मामलों में संलिप्त रहने के आरोप हैं.
जब्त की गई संपत्तियों में मारुति XL6 कार (नंबर UP81CV8210) शामिल है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 5.76 लाख रुपये बताई गई है.
इसके अलावा दोनों अभियुक्तों के विभिन्न बैंक खातों में जमा 1,60,842.86 रुपये की धनराशि को फ्रीज कर कुर्क किया गया है. इस प्रकार कुल जब्त संपत्ति का मूल्य 7,36,842.86 रुपये है.
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अशोक कुमार पाण्डेय के विरुद्ध हत्या, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने, धार्मिक भावनाएं भड़काने, धमकी देने और सरकारी आदेशों की अवहेलना जैसे मामलों सहित कई मुकदमे विभिन्न थानों में दर्ज हैं.
वहीं, महामंडलेश्वर अन्न पूर्णा भारती के खिलाफ भी सांप्रदायिक तनाव फैलाने, आपराधिक षड्यंत्र तथा अन्य गंभीर धाराओं में कई मुकदमे दर्ज बताए गए हैं.
थाना देहलीगेट पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई थाना रोरावर में दर्ज मु0अ0सं0 458/25 के अंतर्गत गैंगस्टर अधिनियम की धाराओं 2/3 में की गई. इसके बाद गैंगस्टर अधिनियम की धारा 14(1) के तहत अभियुक्तों द्वारा कथित रूप से अवैध तरीके से अर्जित संपत्तियों को चिन्हित कर जिला मजिस्ट्रेट की स्वीकृति के बाद कुर्क किया गया.

