पुणे, 04 जुलाई (ता)। महाराष्ट्र सरकार के नए सूचना का अधिकार (आरटीआई) नियमों को लेकर उठे विवाद के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा फैसला लिया है। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की भूख हड़ताल की चेतावनी के बाद सरकार ने इन नियमों को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का आदेश दिया है। नए नियमों में आरटीआई आवेदन शुल्क बढ़ाने, आवेदक से पहचान पत्र अनिवार्य करने और एक आवेदन में केवल एक ही विषय रखने जैसी शर्तें शामिल थीं। इन बदलावों को लेकर विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने सरकार पर पारदर्शिता कमजोर करने का आरोप लगाया था। अब मुख्यमंत्री के इस कदम को सरकार के बैकफुट पर आने के तौर पर देखा जा रहा है।
बता दें कि सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने सरकार से श्महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, 2026श् को वापस लेने की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि ये नियम आरटीआई कानून की मूल भावना को कमजोर करते हैं तथा नागरिकों के लिए जानकारी हासिल करना और मुश्किल बना देते हैं। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर आरटीआई नियमों में किये गये बदलाव वापस नहीं लिए गए तो वह पांच जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे।
मुख्यमंत्री को भेजे गए एक ज्ञापन में हज़ारे ने दावा किया कि नए नियम से अपील की प्रक्रिया में प्रक्रियात्मक बाधाएं आयेंगी, ज़्यादा लागत और जटिलताएं पैदा होंगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही कमजोर होगी। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी और 12 जून को सरकारी राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के अनुसार, नए नियम प्रकाशन के साथ ही तुरंत लागू हो गए थे। नए नियमों के तहत, सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत जानकारी मांगने वाले आवेदकों को 30 रुपये का आवेदन शुल्क देना होता।
एक और अहम बदलाव यह है कि आवेदकों को आरटीआई आवेदन के साथ भारतीय नागरिकता साबित करने वाले फोटो पहचान पत्र की खुद से प्रमाणित प्रति जमा करनी होगी। ऐसे सबूत के बिना दिये गये आवेदनों को जरूरी जानकारी पूरी करने के लिए वापस भेजा जा सकता है। नियमों के अनुसार, अगर मांगी गई जानकारी सरकार या संबंधित सरकारी संस्था की आधिकारिक वेबसाइट पर पहले से मौजूद है, तो जन सूचना अधिकारी आवेदक को उसकी कॉपी देने के बजाय उसे ऑनलाइन देखने के लिए कह सकता है। नियम में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आम तौर पर सार्वजनिक गतिविधि या जनहित से जुड़ी न होने वाली निजी जानकारी का खुलासा नहीं किया जाएगा, जब तक कि कोई बड़ा जनहित साबित न हो जाए।
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