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    Home»चुनाव»सारनाथ का प्राचीन बौद्ध स्थल” यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल
    चुनाव

    सारनाथ का प्राचीन बौद्ध स्थल” यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comJuly 26, 2026No Comments3 Views
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    आज दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत 2025-26 चक्र के लिए भारत की आधिकारिक दावेदारी वाले “सारनाथ के प्राचीन बौद्ध स्थल” को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया। यह सम्मान पाने वाली यह भारत की 45वीं धरोहर बन गई है। यह वैश्विक सम्मान भारत की लंबे समय से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत का जश्न मनाता है और वास्तुकला की उत्कृष्टता, क्षेत्रीय पहचान और ऐतिहासिक निरंतरता की विविध परंपराओं को प्रदर्शित करता है।

    यूनेस्को/माननीय एचसीएम/माननीय पीएम का ट्वीट
    माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी, माननीय केंद्रीय संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत और उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि की सराहना की और भारत के लोगों को इस कामयाबी के लिए बधाई दी।

    प्राचीन बौद्ध स्थल, सारनाथ
    इस सूची में शामिल स्थल के दो भाग हैं – चौखंडी स्तूप और सारनाथ के पुरातात्विक अवशेष (धमेक स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, मूलगंधकुटी विहार, अशोक स्तंभ, आदि), जो उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित हैं। ये दोनों हिस्से मिलकर सारनाथ के प्राचीन स्थल के वास्तुशिल्प और पुरातात्विक अवशेषों को संजोए हुए हैं। बौद्ध परंपरा में इस स्थल को अलग-अलग नामों, ऋषिपत्तन, इषिपत्तन, मृगदाव के नाम से जाना जाता है। ये सभी नाम एक पवित्र स्थान की ओर इशारा करते हैं, जहाँ छठी शताब्दी ईसा पूर्व में बुद्ध आए थे और उन्होंने अपना पहला उपदेश दिया था, जिसे ‘धर्म के पहिये का घूमना’ (धर्मचक्र प्रवर्तन ) कहा जाता है। इसी घटना से बौद्ध संघ की शुरुआत हुई और आर्य अष्टांगिक मार्ग के सिद्धांतों की स्थापना हुई।

    खुद बुद्ध ने सारनाथ को बौद्ध तीर्थयात्रा के चार मुख्य स्थलों में से एक बताया था। सदियों तक शाही, मठवासी और आम लोगों के संरक्षण से इसका विकास हुआ। गौतम बुद्ध ने जहाँ अपना पहला उपदेश दिया था और जहाँ वे अपने पहले शिष्यों से मिले थे, उस जगह के आस-पास कई स्तूप, मंदिर और विहार बनाए गए। 12वीं सदी ईस्वी में पतन और उसके बाद हुई तबाही के कारण यह जगह गुमनामी में चली गई, जब तक कि 18वीं सदी में इसे फिर से खोजा नहीं गया।

    इस जगह पर प्राचीन स्मारकों का एक समूह है, जो पूर्व-मौर्य काल (5वीं-4वीं सदी ईसा पूर्व से तीसरी सदी ईसा पूर्व) से लेकर 12वीं सदी ईस्वी में सारनाथ के विनाश तक बनाए गए थे (इसमें बाद में कुछ और चीजें भी जोड़ी गईं)।

    भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा सारनाथ में बड़े पैमाने पर खुदाई की गई है, जिससे 16 सदियों (5वीं-4वीं सदी ईसा पूर्व से 12वीं सदी ईस्वी) तक फैली हुई अलग-अलग दौर की बस्तियों का पता चला है।सारनाथ को विश्व धरोहर स्थल घोषित किए जाने के बाद, बौद्ध तीर्थयात्रा के चार सबसे महत्वपूर्ण स्थलों में से तीन, लुंबिनी (नेपाल), महाबोधि मंदिर, बोधगया (बिहार) और अब सारनाथ (उत्तर प्रदेश) विश्व धरोहर में शामिल हो गए हैं। इनके साथ ही कई अन्य महत्वपूर्ण बौद्ध स्थल भी इसमें शामिल हैं, जैसे सांची, नालंदा, अजंता (तीनों भारत में), अनुराधापुर (श्रीलंका), पहाड़पुर (बांग्लादेश), तक्षशिला और तख्त-ए-बाही (दोनों आज के पाकिस्तान में) आदि।

    यूनेस्को की विश्व धरोहर संपत्ति के तौर पर सारनाथ

    सारनाथ के प्राचीन स्थल को 1998 में विश्व धरोहर की संभावित सूची में शामिल किया गया था। इस जगह को विश्व धरोहर की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव जनवरी 2025 में विश्व धरोहर समिति के विचार के लिए भेजा गया था। सलाहकार संस्थाओं के साथ कई तकनीकी बैठकों और आईसीओएमओएस के मिशन द्वारा स्थल का निरीक्षण करने जैसी 18 महीने लंबी और गहन प्रक्रिया के बाद, आज शाम दक्षिण कोरिया के बुसान में विश्व धरोहर समिति के सदस्यों ने यह ऐतिहासिक फैसला लिया।

    सारनाथ के स्थायी आध्यात्मिक महत्व को मान्यता देते हुए, “प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ” को मानदंड (iii) और (vi) के अंतर्गत नामांकित किया गया है। सीआर (iii) बौद्ध तीर्थयात्रा के चार मुख्य स्थलों में से एक है, जैसा कि यहाँ सदियों के दौरान बनाई गईं और पुर्निमाण की गईं बड़ी संख्या में धार्मिक इमारतों और अन्य स्मारकों से पता चलता है। वहीं, सीआर(vi) बुद्ध के जीवन की उन घटनाओं से सीधे और ठोस रूप से जुड़ा है, जो बौद्ध समुदाय के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, जैसे उनका पहला उपदेश और उनके पहले शिष्यों से मुलाकात। इन घटनाओं का महत्व और अर्थ सारनाथ में सदियों से निर्मित असंख्य इमारतों में निहित है, जो बुद्ध के संदेश, उनकी शिक्षाओं और त्रिरत्न की अवधारणा के प्रति एक प्रतिक्रिया हैं।

    Ancient Buddhist Site Ancient Buddhist Site of Sarnath" included in the UNESCO World Heritage List tazza khabar UNESCO World Heritage List unisco
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