नई दिल्ली 10 अप्रैल। इलाहाबाद हाईकोर्ट जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को सौंपा है. दिल्ली के सरकारी आवास से जले नोट मिलने के बाद उनका इलाहाबाद तबादला कर दिया गया था. आरोपों के संबंध में एक आंतरिक जांच अभी जारी है. जस्टिस वर्मा ने 5 अप्रैल 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में शपथ ली थी. हालांकि, उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई थी.
जांच के कारण उन्हें न्यायिक कार्यों से दूर रखा गया था. कैश कांड में नाम आने के बाद उनके खिलाफ लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था. जस्टिस वर्मा ने अपने खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को चुनौती दी थी. याचिका में कहा था कि दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन राज्यसभा ने उसे मंजूर नहीं किया.
बता दें कि 14 मार्च 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट का जज रहते उनके सरकारी आवास में आग लग गई थी. फायर ब्रिगेड के अधिकारियों को 500-500 के जले नोट मिले थे. इसके बाद बाद जस्टिस वर्मा विवादों में आ गए. उनका स्थानांतरण वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया. हालांकि, इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के गंभीर विरोध के बावजूद उन्होंने 5 अप्रैल 2025 को यहां शपथ ली.21 जुलाई 2025 को उनके खिलाफ कई दलों के सांसदों ने महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया. जिस पर लोकसभा अध्यक्ष ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बना दी. जस्टिक वर्मा ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी मगर सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज़ कर दी थी. जिसके बाद उन्होंने पद से त्यागपत्र दे दिया.
क्या लिखा है इस्तीफे में : जस्टिस वर्मा ने 5 अप्रैल, 2025 को ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज के तौर पर शपथ ली थी. उन्होंने इस्तीफे की वजह नहीं बताई है. जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने त्यागपत्र में लिखा है- ‘मैं आपके सम्मानित दफ्तर को उन कारणों के बारे में नहीं बताना चाहता, जिसकी वजह से मुझे ये पत्र पेश करना पड़ रहा है. फिर भी बहुत दुख के साथ मैं इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश पद से तत्काल प्रभाव से अपना इस्तीफा दे रहा हूं.’

