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    Home»देश»अदालती कामकाज में न्यायाधीश की जगह नहीं ले सकेगा एआई
    देश

    अदालती कामकाज में न्यायाधीश की जगह नहीं ले सकेगा एआई

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comJune 5, 2026No Comments4 Views
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    नई दिल्ली 05 जून। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की अदालतों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए ‌नियमों का मसौदा जारी कर दिया है।

    प्रस्तावित नियमों में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालती कामकाज में एआई एक सहायक भूमिका में कार्य करेगा और यह जज द्वारा न्यायिक अधिकार के स्वतंत्र प्रयोग का स्थान नहीं लेगा, न ही उसमें कोई बाधा डालेगा। सुप्रीम कोर्ट ने ‘अदालतों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग हेतु विनियम, 2026’ का मसौदा जारी करते हुए सभी हित धारकों और आम जनता को 20 जून, 2026 तक अपने सुझाव और आपत्ति मांगे हैं। मसौदे में कहा कि यह नियमन एआई को कानूनी रिसर्च, ड्राफ्टिंग, अनुवाद, ट्रांसक्रिप्शन और केस प्रबंधन में इस्तेमाल की अनुमति देते हैं, पर साफ करते हैं कि कानून, तथ्यों और न्याय से जुड़े सवालों का फैसला करने का अधिकार सिर्फ जजों के पास ही रहेगा। साथ ही यह भी साफ किया कि एआई हमेशा सहायक टूल की तरह काम करेगा।

    नौकरी निर्धारित योग्यताओं पर ही दें : अदालत
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी नौकरी निर्धारित योग्यताओं के अनुसार योग्य उम्मीदवारों को ही मिलनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि उच्च योग्यता वाले व्यक्ति को कम योग्यता वाले लोगों के लिए तय नौकरी प्राप्त करने की अनुमति देना योग्य और पात्र उम्मीदवार को वंचित करना है। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने यह टिप्पणी मद्रास हाईकोर्ट का एक आदेश रद्द करते हुए की। हाईकोर्ट ने अस्थायी बैंक परिचारक की सेवा बहाल करने का निर्देश दिया था। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने इस बात को नजरअंदाज किया कि कर्मचारी ने स्नातक होने की बात छिपाकर उस पद पर नियुक्ति प्राप्त की थी जो 10वीं कक्षा तक की योग्यता वाले उम्मीदवारों के लिए आरक्षित था।

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