लखनऊ, 22 जून (ता)। ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाले 40 प्राइवेट कर्मियों से नौकरी के नाम पर पहले तीन-तीन लाख रुपये निजी एजेंसियों ने वसूले। कुल 1.20 करोड़ की धनराशि वसूल की गई। फिर जब कर्मचारियों ने महीने की सैलरी देने से इन्कार किया तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया। पीड़ित कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई है। सीएम कार्यालय को शिकायत भेजी है और परिवहन अधिकारियों की मिलीभगत से हो रही निजी एजेंसियों की लूट की जांच कराने की मांग की है। मामला परिवहन विभाग से जुड़ा हुआ है। डीएल बनाने का काम प्रदेशभर में तीन एजेंसियों सिल्वर टच, फोकाम व रोजमार्टा को सौंपा गया है। जो प्राइवेटकर्मियों से डीएल बनाने व प्रिंटिंग का काम करवाते हैं। गत वर्ष नवंबर में प्रदेशभर के 320 प्राइवेटकर्मियों को दलाल करार दिया गया था, जिसके बाद निजी एजेंसियों ने उन्हें नौकरी से निकाला। फिर उन्हें दोबारा नौकरी पर रखा। नई भर्तियां भी कीं। इन सबमें एजेंसियों के साथ-साथ परिवहन अधिकारियों ने मोटी रकम वसूली। सूत्र बताते हैं कि प्रत्येक कर्मचारी से तीन-तीन लाख रुपये वसूले गए।
सिल्वर टच, रोजमार्टा, फोकाम एजेंसियां की प्रतिवर्ष 4.60 करोड़ रुपये बचाने की योजना है। जबकि यह पैसा एजेंसियों को कर्मचारियों को देना चाहिए। धनराशि के बंदरबांट में परिवहन अधिकारियों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता। निजी एजेंसियों पर कर्मचारियों का आरोप है कि सात महीने से उनसे काम करवाया जा रहा है। लेकिन सैलरी सिर्फ एक महीने की दी गई है।
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