नई दिल्ली, 18 मार्च (दि)। नवरात्र 2026: हिंदू धर्म में नवरात्र का विशेष महत्व है। साल में चार बार नवरात्र का पर्व आता है। इनमें से दो नवरात्र विशेष होती हैं और दो गुप्त नवरात्र होती हैं। चौत्र और शारदीय नवरात्र को प्रत्यक्ष कहा जाता है, जिनमें भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। वहीं, आषाढ़ और माघ मास में आने वाली गुप्त नवरात्र में साधक दस महाविद्याओं की तांत्रिक साधना करते हैं। चौत्र नवरात्र की शुरुआत हिंदू नववर्ष के साथ होती है। इसलिए यह पर्व धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार चौत्र नवरात्र 2026 की शुरुआत 19 मार्च गुरुवार से हो रही है।
इस बार 72 वर्ष बाद अमावस्या और प्रतिपदा नवरात्र में एक ही दिन पड़ रहे हैं और माता डोली पर सवार होकर आ रही हैं, जो प्रकृति, धर्म, आस्था और दान का समन्वय बनाएंगे। वहीं, नवरात्र का समापन 27 मार्च शुक्रवार को होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नवरात्र का समापन शुक्रवार के दिन होता है तो माता दुर्गा का प्रस्थान हाथी पर माना जाता है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
इस वर्ष 19 मार्च को सुबह 6ः52 से 7ः45 तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त है। नैमिषारण्य के चक्र तीर्थ के प्रधान पुजारी राजेंद्र प्रसाद पांडे ने कहा कि वर्ष 1954 में अमावस्या और प्रतिपदा एक ही दिन पड़ा था। इस बार भी पहला नवरात्रा पड़ रहा है। इसके बाद देश में आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता आ गई थी।
उन्होंने कहा कि इस विक्रम संवत 2083 में सब शुभ होगा। मां की कृपा से आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। इस बार हिंदू नव वर्ष गुरुवार को पड़ रहा है। इसलिए इस साल के राजा देव गुरु बृहस्पति यानी गुरु हैं। गुरु ज्ञान के दाता है और ज्ञान होने पर सब कुछ जीवन में आसान हो जाता है। उन्होंने कहा कि ग्रहों के सहयोग से डोली में सवार होकर मां आएंगे और भक्तों की मनोवृत्ति को अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाएगी। उन्होंने कहा कि मां डोली पर सवार होकर जब भी नवरात्रि में आती है, तो एक मां अपने बच्चों के साथ वात्सल्य भाव रखती है। इस तरह पूरा विश्व भी वात्सल्य भाव में रहता है। मां का वात्सल्य हमेशा बड़ा होता है। इससे विकास की गति को एक नयी ऊंचाई और ऊर्जा मिलती है।
उन्होंने कहा कि सुबह 11ः36 से अपराह्न 12ः24 तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। इस वर्ष खरमास के दौरान नवरात्र पड़ रही है, लेकिन देवी पूजा के लिए यह समय दोष मुक्ति माना गया है। पहले खरमास 13 मार्च से लगा है, जो 14 अप्रैल तक चलेगा। भारत वर्ष इस बार विशेष तरक्की करेगा। ऐसी हम सभी की कामना एवं ईश्वर से मन से प्रार्थना है।
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