मेरठ 07 मई (प्र)। मेरठ में एक 12 वर्षीय बालक की डूबने से मौत के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित टीम ने नगरीय क्षेत्र के स्विमिंग पूलों का निरीक्षण किया और लिसाड़ी गेट स्थित एक पूल को सील कर दिया।
यह घटना बीते रविवार को जनकपुरी के वाटरलैंड स्विमिंग पूल में हुई थी। बालक की मौत के बाद जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने जांच के लिए एक समिति गठित की थी। सिटी मजिस्ट्रेट ने भी पूल का निरीक्षण किया और आगे की कार्रवाई के लिए अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंपेंगे।
जिले में 100 से अधिक स्विमिंग पूल संचालित होने का अनुमान है, हालांकि प्रशासन या संबंधित विभागों के पास इनकी सही संख्या और एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) संबंधी कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। पूर्व में भी कई हादसे हो चुके हैं।
आमतौर पर हादसों के बाद ही प्रशासन की नींद खुलती है और नियमों की याद आती है। कुछ दिनों की सख्ती के बाद स्थिति सामान्य हो जाती है। पूल संचालक भी चार महीने के सीजन में जांच के कारण एक भी दिन का नुकसान नहीं चाहते।
स्विमिंग पूलों के संचालन के लिए सख्त नियमावली है। इसके तहत पूल को खेल निदेशालय से अनुमति प्राप्त होनी चाहिए। कोच राष्ट्रीय या राज्य स्तर का खिलाड़ी होना चाहिए, और लाइफ गार्ड साई द्वारा प्रमाणित या फौज/पीएसी से जुड़ा होना अनिवार्य है।
पूल में फिल्टर प्लांट होना चाहिए जो 24 घंटे में कम से कम चार घंटे चले। पानी की शुद्धता के लिए स्वास्थ्य विभाग से जांच रिपोर्ट भी आवश्यक है। आपात स्थिति के लिए ऑक्सीजन के साथ लाइफ सेविंग किट अनिवार्य है। प्रत्येक तैराक का विवरण एक रजिस्टर में दर्ज होना चाहिए।
चेंजिंग रूम की सुविधा, पूल की गहराई की स्पष्ट मार्किंग और फिसलन रहित टाइल्स का होना भी जरूरी है। सभी नियम एक बोर्ड पर लिखकर प्रदर्शित किए जाने चाहिए, जिसमें निकटतम अस्पताल की जानकारी भी शामिल हो।
स्विमिंग पूल का अधिकतम आकार 25×50 मीटर और न्यूनतम 6×10 मीटर होना चाहिए। लर्निंग पूल की गहराई 4.5 फीट से अधिक नहीं होनी चाहिए।

