मेरठ 08 जून (प्र)। हर में गंदगी और बदबू का पर्याय बन चुके आबू नाला अब कवर्ड होगा और उस पर गाड़ियां दौड़ सकेंगी। जनप्रतिनिधियों की पहल पर कमिश्नर ने नगर निगम और नगर निगम ने जल निगम के सीएंडडीएस को सर्वे की जिम्मेदारी दी है। इसी तरह जली कोठी से बच्चा पार्क के बीच पटेल नगर नाले की भी सूरत बदलने की तैयारी शुरू हो गई है।
कैंट विधायक अमित अग्रवाल और अन्य जनप्रतिनिधियों ने कमिश्नर को सुझाव दिया था कि आबू नाले को पाटकर ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है। इस पर कमिश्नर भानू चंद्र गोस्वामी के निर्देश पर नगर निगम और जल निगम के सीएंडडीएस इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने की तैयारी में जुट गए हैं। इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें नगर निगम के साथ-साथ कैंट बोर्ड के क्षेत्र को भी शामिल किया गया है।
अधिकारियों के अनुसार जल निगम द्वारा होने वाले सर्वे का दायरा विस्तृत है, जिसमें कैंट क्षेत्र में कंकरखेड़ा शराब मिल से लेकर कैंट क्षेत्र होते हुए बेगमपुल तक और नगर निगम क्षेत्र में बेगमपुल से कचहरी, मोहनपुरी, मंगल पांडे नगर होते हुए शास्त्रीनगर रंगोली मंडप वाले पुल तक का हिस्सा शामिल है। सर्वे टीम नाले की लंबाई, चौड़ाई, गहराई और अतिक्रमण की स्थिति का बारीकी से आकलन करेगी।
अधिकारियों के अनुसार चर्चा के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि सरकारी रिकॉर्ड में आबू नाले की चौड़ाई पटरी सहित लगभग 42 मीटर है। चूंकि अहमदाबाद जैसे शहरों में नाले को ढककर सड़क बनाने का मॉडल पहले ही सफल रहा है। इसलिए मेरठ में भी पर्याप्त जगह होने के कारण इसे आसानी से लागू किया जा सकेगा। आबूनाले के ढक जाने से न केवल शहर को गंदगी से मुक्ति मिलेगी, बल्कि यातायात के लिए एक नया और सुगम मार्ग भी उपलब्ध हो सकेगा।
नगर आयुक्त सौरभ गंगवार का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के सुझाव और कमिश्नर साहब के निर्देश पर सीएंडडीएस को सर्वे की जिम्मेदारी दी गई है। उम्मीद है कि आबू नाला ट्रैफिक का एक विकल्प होगा। जली कोठी से बच्चा पार्क तक पटेल नगर नाले का भी प्रस्ताव है।

