नई दिल्ली, 17 मार्च (अम)। देश में दत्तक ग्रहण (बच्चा गोद लेने) की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) ने राष्ट्रव्यापी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के तहत अब बाल देखभाल संस्थानों में रहने वाले या गोद लिए जाने वाले बच्चों की फोटो, वीडियो या पहचान संबंधी कोई भी जानकारी सोशल मीडिया या किसी अन्य माध्यम पर साझा करना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा।
कारा ने कहा है कि किशोर न्याय अधिनियम, 2015 और दत्तक ग्रहण विनियम, 2022 के तहत बच्चों की गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य है। साथ ही जैविक माता-पिता के लिए दो माह की पुनर्विचार अवधि का कड़ाई से पालन करना होगा, ताकि किसी भी बच्चे को कानूनी रूप से स्वतंत्र घोषित करने से पहले सभी विकल्पों पर विचार किया जा सके। कारा ने कहा कि संस्था चालू हो या बंद बच्चों से संबंधित डिजिटल और भौतिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना राज्यों की जिम्मेदारी है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस कदम का उद्देश्य उन वयस्क दत्तक बच्चों की मदद करना भी है, जो भविष्य में अपनी जड़ों (मूल खोज) के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं।
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