मेरठ 05 जून (प्र)। अब तक की सबसे तेज रफ्तार वाली मेट्रो और रैपिड रेल भले ही फर्राटा भरने लगी है, लेकिन इस परियोजना के लिए लाल निशान लगने के बाद दिल्ली रोड के तमाम दुकानदार त्रिशंकु बनकर अधर में लटक गए हैं। लाल निशान लगने के बाद कई दुकानों के अधिग्रहण की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। न तो दुकानें खाली कराकर पीछे कराई जा सकी हैं और ना ही मुआवजे का भुगतान हो सका है।
दिल्ली रोड स्थित जगदीश मंडप के सामने और बहादुर मोटर्स के पास की कुछ दुकानों के अधिग्रहण की प्रक्रिया ही अधूरी है। व्यापारी मुनीश ने बताया कि उनकी जगदीश मंडप के सामने दो दुकानें हैं। करीब एक करोड़ रुपये का मुआवजा स्वीकृत होना था, लेकिन अब तक अधिग्रहण का प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। वह बताते हैं कि संबंधित अभिलेखों में उनके खसरा नंबर 1671 और 1672 रिकॉर्ड से गायब बताए जा रहे हैं। इस कारण प्रक्रिया अटक गई है। व्यापारियों का कहना है कि वे कई बार संबंधित विभागों से संपर्क कर चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। व्यापारी दीपेंद्र ने बताया कि कुछ समय पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों से मिले थे। उन्होंने कहा कि टीम मौके पर आकर निरीक्षण करेगी। व्यापारियों के लिए मुआवजे की व्यवस्था की जाएगी। मुनीश ने बताया कि उनके अलावा उनके अलावा बंटी, रामा पैनल और श्रीजी इलेक्ट्रॉनिक्स को भी ना तो पीछे हटाया गया और ना ही मुआवजा मिला है।
संयुक्त व्यापार संघ महामंत्री दलजीत सिंह ने बताया कि जगदीश मंडप के सामने और बहादुर मोटर्स के बराबर में कुछ दुकानों को लाल निशान लगने के बाद बी अभी तक पीछे नहीं किया जा सका है। वह दुकानें जहां तब थीं, वहीं अब भी हैं। बहादुर मोटर्स के पास कुछ दुकानें ऐसी भी हैं, जो विवादित होने की वजह से मुआवजे से वंचित हैं। इसी तरह जगदीश मंडप के सामने जो दुकानें हैं, उनके स्वामियों ने अपने कागज जमा नहीं किए हैं।
संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष नवीन गुप्ता ने बताया कि उनकी बृहस्पतिवार सुबह एडीएम एलए से फोन पर बात हुई। एडीएम एलए ने कहा कि उनके संज्ञान में नहीं है कि दिल्ली रोड के किसी व्यापारी का मुआवजा रुका हुआ है। जिनका मुआवजा रुका है वह तुरंत आकर मिले उनकी समस्याओं का समाधान किया जाएगा। जो व्यापारी रह गए हैं उनको मुआवजे की रकम दी जाएगी।

