स्वास्थ्य को लेकर पहले भी हर कोई सक्रिय और संवेदनशील रहता था। और आज भी स्थिति वहीं है। क्योंकि पूर्व में आने जाने के सुविधाजनक साधन कुछ ही लोगों पर हुआ करते थे। इसलिए आम आदमी का चलना फिरना खूब हो जाता था। और वो हष्ट पुष्ट और प्रसन्न रहा करता था। उसे पता ही नहीं चलता था कि उसकी खुशी का असली राज पैदल चलना और शारीरिक कार्य करना हुआ करता था। यह तो नहीं कह सकते कि तब बीमारियां नहीं होती थी। मगर एक तो साधन कम होने से पता नहीं चलती थी और सुबह से शाम तक जो काम किया जाता था तथा खानपान भी गरीब अमीर सबका भारतीय भोजन ही होता था इसलिए वो सुखी और प्रसन्न रहते थे लेकिन अब जब से देश में पश्चिमी देशों के प्रचलित पिज्जा मोमोज चाऊमीन जैसे भोजन बच्चों में लोकप्रिय हुए तो बड़े भी उनका सेवन करने लगे। बिगड़ता पर्यावरण संतुलन और चारों तरफ फैली गंदगी ने हमें कई बीमारियों से पीड़ित कर दिया। ऐसे में अब जैसा कि जानकार या बुजुर्ग कहते हैं जीवन सुखी और स्वस्थ रहने के लिए योग वक्त की सबसे बड़ी मांग बन गया है। हर आदमी जिम नहीं जा सकता और महंगे योगाचार्यों या जिम ट्रेनरों से सीखकर या उनके द्वारा बताए जाने वाले ना तो व्यायाम कर सकता है क्योंकि पैसा और समय चाहिए। एक बड़ा वर्ग जो साधन संपन्न है वो सबकुछ वहन कर रहा है। और गरीबी की रेखा के पास जीवन यापन करने वाला आदमी भी क्योंकि मेहनत ज्यादा करते हैं तो लकड़ हजम पत्थर हजम वाली कहावत के अनुसार वो स्वस्थ रहता है क्योंकि उसे इस प्रदूषण और बीमारियों से लड़ने की क्षमता बनी रहती है। अब बात करे मध्यम दर्जे कि तो परिवार को सुखी रखने और जितनी आमदनी है उसी में सही स्थिति बनाए रखने और व्यायाम या जिम पर पैसा खर्च करने की बजाय बच्चों की आवश्यकता पूरी करना उसकी बड़ी जिम्मेदारी है। इन सभी बातों को देखकर जितना जीवन में मैंने खुद अनुभव किया है अगर आप फालतू व्यवस्थाओं में ना फंसकर जीवन से तनाव को दूर रखते हैं तो पैदल चलने से बढ़िया कोई साधन स्वस्थ रहने के लिए नजर नहीं आता है। एक हिसाब से देखें तो आम के आम गुठलियों के दाम वाली कहावत इस पर सही उतरती है। मगर समाज में सभी स्वस्थ रहे तभी वो घर हो या बाहर सब सही रहेंगे और प्रगृति भी करेंगे।
कल सात अप्रैल को हम वर्ल्ड हेल्थ दिवस मनाने जा रहे हैं। तो मुझे लगा कि इस पर कोई ना कोई चर्चा सकारात्मक रुप से जिसे सभी अपना सके अमीर गरीब और मध्यम दर्जे का हर व्यक्ति उसे आत्मसात कर सके। इसलिए सोने में सुहागा वाली बात यही हो सकती है कि हम जितना ज्यादा से ज्यादा सुबह जरुरी काम से निपटकर और रात को खाना खाने के बाद चिकित्सकों की राय के अनुसार पैदल चल सकें उतना ही यह जीवन के लिए रामबाण वाली बात कही जा सकती है। एक समय था जब हमें स्वस्थ दिनचर्या के लिए कदम गिनने की जरुरत नहीं पड़ती थी क्योंकि ज्यादातर कार्य पैदल चलने से पूरे होते थे और बस अडडे तक पैदल जाना होता था। अब यह कम हो गया है तो स्मार्टवॉच का जमाना आया जिसमें दर्ज नंबर हमें निश्चित कर रहे हैँ कि आज हम कितने कदम चलें और कितनी कैलोरी खर्च की। इस बारे में १९६० के दशक में जापानी कंपनी केंपन निकला टोक्यो ओलंपिक के दौर में इस कंपनी ने कदम गिनने वाली मशीन लांच की और बताया कि १० हजार कदम की थ्योरी अपनाने से स्वस्थ रह सकते हैं। कुछ समय बाद यह चुनौती जब पूर्ण लगी तो इसके साथ ही ७००० कदम चलने की व्यवस्था सामने आई और कहा गया कि इतना चलने से भी हम स्वस्थ रह सकते हैं। तो कुछ चिकित्सकों और कंपनियों ने एक नई युक्ति पेश की कि अगर आप चार हजार कदम भी चलते हैं तो शुगर लेबल संतुलित रहेगा। मानसिक तनाव घटानें में प्रभावी होगा। यूरोपीय जनरल औफ कॉर्डिलोजिस्ट के अनुसार चार हजार कदम आपकी उम्र १५ प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। ऐसी अनेकों कंपनियां और चिकित्सक वर्तमान समय में दुनिया में सक्रिय हैं और इस मामले में काफी मोटा माल भी कमा रहे हैँ। डब्ल्यूएचओ की २०२२ की रिपोर्ट के अनुसार शारीरिक निष्क्रियता अब एक वैश्विक संकट बन चुकी है। अब ८० प्रतिशत से ज्यादा किशोर और एक चौथाई से ज्यादा व्यस्क शारीरिक गतिविधियां भी पूरी नहीं कर पा रहे हैं। यही हाल रहा तो ५० हजार रोग सामने आ सकते हैं और इनके इलाज पर ३०० अरब डॉलर खर्च की उम्मीद की जाती है।
अब अगर हम इसे टालना चाहते हैं तो हमें या तो मूवन्टुअर्न कॉन्सेप्ट पर आधारित फिटनेस एप्स अपनाने होंगे जो आपके कदमों को रिवार्ड में बदल रहे हैं जैसे स्टेप सेट गो हर कदम पर कॉइन देता है। अगर आप स्मार्टवॉच यूज करते हैं तो इस व्यवस्था से गजैट कूपन खरीदे जा सकते हैं। ग्रो फिटर वाक रन साईकिलिंग पर पाइंटस देता है जिस पर कैश बैक या मूवी टिकट मिलते हैं तो जानकारों के अनुसार यह आमदनी का जरिया कुछ प्रकार से बनते हैं। वैसे तो हर व्यक्ति अपने घरेलू चिकित्सक अथवा इंटरनेट पर जानकारी लेकर स्वास्थ्य के लिए नीति बनानी चाहिए क्येांकि करेला किसी को पच किसी को कुपच की भांति स्वस्थ रहने के साधन भी सब एकसमान नहीं होते। बताते हैं कि अगर आप दिन में कुछ मिनट के लिए जीना चढ़े उतरें तो आपका मोटापा ब्लड शुगर से बच सकते हैं। इसी प्रकार साधारण व्यायाम करने से भी आप चुस्त दुरुस्त रह सकते हैं और सबसे बड़ी रामबाण व्यवस्था जो बताते हैं कि तनाव से दूर रहो वो संभव नहीं है किसी के लिए भी। इसलिए अब एक ही उपाय बचता है कि हम अपने आराम में कमी लाएं और खुद को सक्रिय करने के लिए तैयार कर कहते हैँ कि अगर खाना खाने के बाद दस मिनट भी पैदल चलें तो काफी लाभदायक होता है। मुझे लगता है कि यह तरीका कम उपयोगी होगा क्योंकि फास्ट फूट और तला भुना खाना और आराम तलबी की भरपाई इससे नहीं हो सकती। इससे सुबह खाली पेट २० मिनट से १ घंटा आप पैदल चलें। तो कितनी ही बीमारियां आपसे दूर रहेंगी। अगर खाना खाने के बाद आघा घंटा टहलें और दोनों समय नमक के पानी से कुल्ले करें तो भी आप काफी आर्थिक बचत कर स्वस्थ रह सकते हैँ क्योंकि जिस प्रकार अच्छे व्यंजन खिलाकर गृहिणी प्रशंसा प्राप्त कर सकती है उसी प्रकार बीमारियों से आप बच सकते हैं। कहने का आश्य है कि २० मिनट से १ घंटा सुबह पैदल चलें। या २० मिनट व्यायाम २० मिनट साइकिल और इतनी ही सेैर पर निकलेंगे तो यह तो ८० प्रतिशत का आंकड़ा है इससे आप बच सकते हैँ और बीमारियों पर खर्च होने वाले पैसे बचाकर आप बच्चों की खुशियों पर खर्च कर परिवार को सुखी रख सकते हैं तो आओ कल सात अप्रैल को वर्ल्ड हेल्थ डे की शुरुआत हम पैदल घूमने योगा करने और साईकिल चलाने का संकल्प लें और कल करे जो आज कर से शुरु हो जाइये और पूरे देश और मानव जाति को संदेश देने की शुरुआत करें। मैं अच्छे स्वास्थ्य के लिए सबको बधाई और शुभकामनांए देते हुए आशा करता हूं कि आप शारीरिक मेहनत करेंगे और अन्य को इसमें शामिल कर सरकार का जो बजट बीमारियेां पर खर्च हो रहा है उसे रोकने में योगदान देंगे।
चलने के कुछ जानकारों द्वारा सही तरीके यह भी हो सकते हैं
चलने के तरीके
चलने की वो शैलियां, जो फिटनेस के दीवानों में छाई हुई हैं-
- साइलेंट वॉक रू न पॉडकास्ट, न संगीत, न फोन, न कोई बातचीत। मकसद, अपने विचारों के साथ अकेले चलते जाना।
2.सॉफ्ट हाइकिंग रू इसमें जोर लक्ष्य तक पहुंचने पर नहीं, बल्कि रास्ते की सुंदरता, पौधों और ताजी हवा का आनंद लेने पर होता है। यह तनाव को कम करने में कारगर है।
3.रेट्रो वॉकिंग रू इसमें पीछे की ओर चलना होता है, चाहे ट्रेडमिल पर हो या पार्क जैसी खुली जगह में। इसमें जांघ के सामने की मांसपेशियां अधिक मेहनत करती हैं, जिससे पैर मजबूत होते हैं। केवल 10-15 मिनट पीछे की ओर चलने से संतुलन में सुधार हो सकता है । - वॉक एंड टॉक रू फोन पर बात करते हुए चलना, ऑफिस मीटिंग को टहलते-टहलते करना। इससे क्रिएटिविटी बढ़ती है, थकान कम होती है।
- फ्रेंडशिप वॉक रू पहले दोस्त मिलते थे कैफे में। अब मिलने का बहाना है-वॉक पर चलें? तभी तो वीकेंड वॉक, सोसायटी वॉकिंग ग्रुप, मॉर्निंग गॉसिप वॉक जैसे समूह सुर्खियों में हैं। यह खास महिलाओं में उभर रहा है, जो उनको एक-दूसरे से भावनात्मक रूप से जोड़ता है।
- ताई ची रू इसमें चलने का हर कदम सोच-समझकर उठाया जाता है, जैसे पैर कैसे जमीन पर पड़ता है, सांसों की गति पर ध्यान देना, रीढ़ की हड्डी कैसे सीधी रहती है आदि।
- इंटरवल वॉकिंग रू इस जापानी वॉकिंग तकनीक में एक निश्चित अवधि के लिए धीमी और तेज गति के अंतराल में चलना शामिल है।
सही चाल का मंत्र
चलना सबसे आसान व प्राकृतिक व्यायाम माना जाता है, मगर क्या आप जानते हैं कि हर तरह का चलना एक जैसा नहीं होता? तेज चाल से चलना, ढलान पर चलना, पीछे की ओर चलना या माइंडफुलनेस वॉक, हर तरीके का असर शरीर और हड्डियों पर अलग-अलग पड़ता है। औसतन व्यक्ति 4-5 किमीध्घंटा की रफ्तार से चलता है। लेकिन आप फिटनेस व वजन घटाने के लिए वॉक करने की सोच रहे हैं, तो आपकी गति 4.5-6 किमीध्घंटा होनी चाहिए, जिससे कैलोरी बर्न ज्यादा हो। वहीं अगर आप ब्रिस्क वॉक यानी तेज चाल चल रहे हैं, तो 5-6 किमीध्घंटा की तेजी होनी चाहिए। बता दें कि नियमित ब्रिस्क वॉक दिल, वजन और फिटनेस, तीनों के लिए फायदेमंद होती है। यह लगभग 100 कदम प्रति मिनट के बराबर है। लेकिन चलते समय पोस्चर का सही रहना जरूरी है। जितना मैंने देखा पैदल चलना किसी यूनिवर्सिटी से कम नहीं है क्योंकि लोगेां से मित्रता बढ़ती और सबकी चर्चा से जो ज्ञान मिलता है वो किसी विवि में आपको नहीं मिलता और मित्रता का दायरा बढ़ता है और मित्र आपको पैदल चलने से मिल जाते हैं।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
