प्रयागराज, 01 अप्रैल (हि)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा कि पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पति की मृत्यु के बाद भी समाप्त नहीं होती। ऐसे में विधवा को ससुर से भरण-पोषण मांगने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि यह स्थापित सिद्धांत है कि पति अपनी पत्नी के भरण-पोषण के लिए बाध्य है। यह दायित्व उसकी मृत्यु के बाद भी जारी रहता है। टिप्पणी न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा एवं सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने अकुल रस्तोगी की अपील पर की है। पति ने परिवार न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें पत्नी के खिलाफ झूठा बयान देने की कार्रवाई की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया। पति का आरोप था कि पत्नी ने भरण-पोषण पाने के लिए गलत जानकारी दी और खुद को गृहिणी कहा जबकि वह नौकरी करती है। उसने यह भी दावा किया कि पत्नी के पास 20 लाख रुपये से अधिक की सावधि जमा (एफडीआर) थी, जिसे छिपाया। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि यदि विधवा पति की संपत्ति, अपने माता-पिता या बच्चों से भरण-पोषण प्राप्त करने में असमर्थ है तो वह ससुर या उसकी संपत्ति से गुजारा भत्ता मांग सकती है बशर्ते पुनर्विवाह न हुआ हो।
Trending
- नासिक TCS केस में 5 बड़े खुलासे, निदा खान ने कबूला- मैं ही देती थी नमाज की ट्रेनिंग
- पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित कारोबारों के लिए 2.5 लाख करोड़ रुपये की ऋण गारंटी योजना पर विचार
- सहारनपुर : दो मुंह वाले सांप से नोटों की बारिश, कीमत 15 लाख, ऑडी कार वाले ठग की स्क्रिप्ट आपको चौंका देगी
- गुदड़ी बाजार पहुंची CBI, 11 करोड़ के लोन के मामले में पड़ताल; शाहिद अखलाक के घर छापे की चर्चा, जानिये पूरा मामला
- अमेरिका में ‘फेक’ पिज्जा डिलीवरी के जाल में फंसा भारतीय युवक, गोली मारकर हत्या
- तीन महीने में दूसरी बार महंगा हुआ घरेलू सिलिंडर, रसोई गैस में 29 रुपये बढ़े; जानें नई कीमत
- मेरठ के 40 केंद्रों पर 18 हजार अभ्यर्थी, जिले के अर्थशास्त्र के अभ्यर्थियों का केंद्र 650 किमी दूर
- हाथों में हुनर, साथ में नाबार्ड और बैंक का सहारा, 30 ग्रामीण महिलाएं बनेंगी उद्यमी

