प्रयागराज, 01 अप्रैल (हि)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा कि पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पति की मृत्यु के बाद भी समाप्त नहीं होती। ऐसे में विधवा को ससुर से भरण-पोषण मांगने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि यह स्थापित सिद्धांत है कि पति अपनी पत्नी के भरण-पोषण के लिए बाध्य है। यह दायित्व उसकी मृत्यु के बाद भी जारी रहता है। टिप्पणी न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा एवं सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने अकुल रस्तोगी की अपील पर की है। पति ने परिवार न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें पत्नी के खिलाफ झूठा बयान देने की कार्रवाई की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया। पति का आरोप था कि पत्नी ने भरण-पोषण पाने के लिए गलत जानकारी दी और खुद को गृहिणी कहा जबकि वह नौकरी करती है। उसने यह भी दावा किया कि पत्नी के पास 20 लाख रुपये से अधिक की सावधि जमा (एफडीआर) थी, जिसे छिपाया। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि यदि विधवा पति की संपत्ति, अपने माता-पिता या बच्चों से भरण-पोषण प्राप्त करने में असमर्थ है तो वह ससुर या उसकी संपत्ति से गुजारा भत्ता मांग सकती है बशर्ते पुनर्विवाह न हुआ हो।
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