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    Home»देश»कितने पढ़े लिखे हैं होगा सर्वे सुविधाएं देने हेतु, अधिकारों की प्राप्ति हेतु अनपढ़ और कम पढ़े लिखे को होना होगा एकजुट
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    कितने पढ़े लिखे हैं होगा सर्वे सुविधाएं देने हेतु, अधिकारों की प्राप्ति हेतु अनपढ़ और कम पढ़े लिखे को होना होगा एकजुट

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comMarch 21, 2026No Comments10 Views
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    क्षेत्र में बेहतर विकास और रोजगारपरक योजनाएं बनाने के दृष्टिकोण से प्रदेश के हर जिले में एक सर्वे जिला अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग निजी एजेंसियों और एनजीओ के माध्यम से कराने की तैयारी कराने में लगा है। इसमें यह पता किया जाएगा कि आपके परिवार में कितने लोग हैं और दसवीं से ज्यादा पढ़ाई करने वालों की संख्या क्या है। साथ ही अन्य प्रकार की जानकारियां मांगे जाने की ओर संबंधित खबर इशारा कर रही है अगर देखें तो प्रथम दृष्टया यह गलत भी नहीं है। मगर सवाल यह उठता है कि आखिर सरकार कितने सर्वे कराएगी। और आखिर में उसके परिणाम अभी तक हुए सर्वो में क्या निकले उसका भी अवलोकन हो और उसके कार्यों से जनता कितनी संतुष्ट है यह भी स्पष्ट हो। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलीयन की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में यह कदम उठाना बताया जा रहा है। यह श्रम बल सर्वेक्षण जो शुरु हुआ है इसके कितने परिणाम आएंगे और इस पर कितना धन खर्च होगा यह तो वक्त ही बताएगा। सर्वेक्षण के लिए कई प्रकार के चरणों के सवाल तय किए गए हैं। इसमें भी किसी को ऐतराज नहीं है मगर सवाल यह उठ रहा है कि अपने कृषि प्रधान देश में कम शिक्षित और निरक्षर लोगों की कोई कमी नहीं है जो अपनी सोच और अनुभव के दम पर कई कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। अगर देखें तो आम आदमी को पेट भरने के लिए अन्न और अन्य खाद्य सामग्री उत्पादन करने में कम पढ़े लिखे का बड़ा योगदान है। इनमें किसान और मजदूर भी है। होना तो यह चाहिए था कि देश के विकास में किसका कितना योगदान है यह सर्वे होता लेकिन मुझे लगता है कि एसी कमरों में बैठकर विकास और अन्य मुंगेरीलाल के हसीन सपने के समान यह श्रम बल सर्वेक्षण हो रहा है। इसकी नियमावली और योजना व बिंदु तैयार करने वालों ने जमीनी जानकारी प्राप्त नहीं की और उन्हें अपने आप शायद होगा नहीं हो देश के भूगोल व नागरिकों की कार्यप्रणाली का पूर्ण ज्ञान रखते हों। कई दशक से शिक्षितों के नाम पर जो योजनाओं में बंदरबाट चल रही है उसमें किसको क्या मिल रहा है और उसका देशहित में कितना योगदान है यह देखने की किसी को फुर्सत नहीं है। मेरा मानना है कि सीएम योगी कितने पढ़े हैं के साथ ही यह सर्वे भी कराएं कि दसवीं से कम और निरक्षर लोगों का क्या योगदान है और इसके लिए शहर व गांव के कुछ लोगों से ही बात करके ही सर्वेक्षण पूरा नहीं माना जाना चाहिए। इस दौरान खेतों मजदूरों से भी चर्चा एनजीओ और जिला अर्थ एवं सांख्यिकी अधिकारी करें तो सर्वे का लाभ होगा वरना घर में चार बेटे हैं काम तो एक ही करता है और बाकी तीनों पढ़े लिखें के नाम पर मौज ज्यादा करते हैं लेकिन हर प्रकार की सुविधा उन्हें मिलती है वाली कहावत चरितार्थ होगी। कम पढ़े लिखे लोगों का कसूर क्या है। सरकार उनके अनुभव व काम को ध्यान रखते हुए उनकी भलाई के बारे में क्यों नहीं सोचती। मुझे लगता है कि खेतों में काम करने वाले और निरक्षण लोगों को भी अपने अधिकारों का ध्यान आकर्षित करने हेतु अपनी बात समाज के सामने लानी होगी तभी सम्मान और अधिकार प्राप्त होगा वरना किताबी ज्ञान और इंग्लिश शब्द बोलने वालों को अधिकार और संरक्षण मिलते रहेंगे और आम आदमी पहले की तरह आज भी दो रोटी और घर की छत के लिए संघर्ष करता रहेगा। हर जगह जिंदा व्यक्ति की पूछ होती है इसलिए ऐसे सर्वे को ध्यान रख समय आ गया है कि निरक्षर एकजुट हों क्योंकि जितने वोट पड़ते हैं उनमें बड़ा प्रतिशत वोट डालकर यह निरक्षर ही सरकार बनाती है। अगर कम पढ़े लिखों के वोट चाहिए तो सरकार को जागरूक करना होगा तभी जो काम करेगा वो खाएगा और जो नहीं करेगा वो बेकार रहेगा वाली किवदंती साकार होगी। इसलिए निरक्षण एक हो जाएं और अपने अधिकारों की प्राप्ति के लिए सबको जागरूक करें।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

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    August 13, 2026

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