मुंबई, 10 मार्च। फिल्म दि पैराडाइज के मेकर्स ने गाना ‘आया शेर’ के लिए 2.5 एकड़ का स्लम सेट बनाया है। हाल ही में रिलीज़ हुए फिल्म दि पैराडाइज़ के गाने ‘आया शेर ने अपनी ज़बरदस्त एनर्जी और कमाल के विजुअल्स से लोगों को इम्प्रेस कर दिया है। इस गाने के इतने बड़े लेवल और असली दिखने के पीछे एक बड़ी वजह फिल्म के आर्ट डिपार्टमेंट की मेहनत है, जिन्होंने बहुत ही शानदार सेट्स तैयार किए। इन सेट्स में भव्यता के साथ-साथ असलियत का भी पूरा तालमेल बिठाया गया है। सबसे खास सेटअप्स में से एक हीरो हाउस (कमान सेट) है, यह 60 फीट चौड़ा, 45 फीट ऊंचा और 25 फीट गहरा एक विशाल स्ट्रक्चर है, जिसे खास तौर पर हीरो के दमदार डिप वाले सीन के लिए बनाया गया था।
शुरुआत में इसे 30 फीट चौड़ा बनाया गया था, लेकिन बाद में दोनों तरफ 15-15 फीट और बढ़ाकर इसकी चौड़ाई 60 फीट कर दी गई। लगभग 25 वर्कर्स ने करीब 20 दिनों तक मेहनत करके इस बड़े स्ट्रक्चर को तैयार किया, और इसे आसपास के माहौल के साथ एकदम असली दिखाने के लिए खास एजिंग (पुराना दिखाने की) तकनीक का इस्तेमाल किया गया। गाने में एक और अनोखी चीज़ देखने को मिली है, वो है बिरयानी के बड़े कटोरे जैसा स्ट्रक्चर। इसे तांबे की फिनिश और पुराना लुक दिया गया है जिससे ये एकदम असली और देसी लगे। 10 फीट चौड़ाई, 20 फीट रेडियस और 6 फीट ऊंचाई वाले इस सेटअप को 5-7 लोगों की टीम ने सिर्फ पांच दिनों में तैयार कर दिया था। प्रोडक्शन के लेवल को और बड़ा बनाने के लिए 2.5 एकड़ में फैला वॉटर बॉडी विलेज सेट तैयार किया गया था, जिसमें डमी स्ट्रक्चर्स के बजाय 60 असली घर बनाए गए थे। लगभग 50 वर्कर्स ने 30 दिनों तक मेहनत करके इस गांव को बनाया, जिसे इस तरह डिजाइन किया गया था कि इसमें एक साथ करीब 500 लोग आ सकें। पानी का सीन क्रिएट करने के लिए 100 टैंकर पानी मंगवाया गया, जिसे भरने में सात दिन लगे। साथ ही, पानी जमा करने के लिए 20 फीट गहरा एक अलग तालाब भी बनाया गया था। प्रोडक्शन ने एक बहुत बड़ा डंप यार्ड सेट भी तैयार किया, जो 120 फुट लंबा, 50 फीट चौड़ा और 30 फीट ऊंचा था। 25 लोगों की टीम ने 30 दिनों की मेहनत से इसे बनाया, जिसका मकसद एक असली डंप यार्ड जैसा रस्टिक और पुराना लुक देना था। इन सेट्स की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन्हें कुदरती माहौल को नुकसान पहुँचाए बिना बनाया गया। आर्ट डिपार्टमेंट ने बहुत सावधानी से इन स्ट्रक्चर्स को वहां की जमीन और नजारों के साथ जोड़ा। असलियत दिखाने के लिए नेचुरल टेक्सचर्स और एजिंग (पुराना दिखाने की) तकनीक का जमकर इस्तेमाल किया गया। हर सेटअप की प्लानिंग बहुत बारीकी से की गई थी ताकि काम बिना किसी रुकावट के और क्रिएटिव तरीके से पूरा हो सके। सभी जरूरी मंजूरियां लेने के बाद ही फाइनल कंस्ट्रक्शन किया गया।
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