चंडीगढ, 01 मई (ता)। भाजपा की पंजाब इकाई का दावा है कि पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बरनाला स्थित प्रसिद्ध उद्योगपति और राज्यसभा सांसद राजिंदर गुप्ता के ‘ट्राइडेंट समूह’ के कारखाने पर छापेमारी की है। राजिंदर गुप्ता हाल ही में आप को छोड़कर भाजपा में शामिल हुए उन सात सांसदों में से एक हैं, जिन्होंने पार्टी के सिद्धांतों से भटकने का आरोप लगाया था।
दोपहर के समय करीब नौ गाड़ियों में सवार पीपीसीबी के अधिकारी फैक्टरी परिसर में पहुंचे और तुरंत जांच शुरू कर दी। करीब तीन से चार घंटे तक चली इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने फैक्टरी में जल और वायु प्रदूषण के स्तर की जांच की। इसके साथ ही उत्पादन प्रक्रिया, अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण मानकों से जुड़े दस्तावेज भी खंगाले। हालांकि, कार्रवाई के बाद किसी भी अधिकारी ने आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया।
इस घटनाक्रम को राजनीतिक संदर्भ में भी काफी अहम माना जा रहा है। राजिंदर गुप्ता को आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा भेजा था लेकिन हाल ही में उन्होंने अन्य छह आप सांसदों के साथ भाजपा का दामन थाम लिया। उनके इस फैसले से आम आदमी पार्टी में नाराजगी साफ दिखाई दी। गुप्ता के भाजपा में जाने के तुरंत बाद लुधियाना स्थित ट्राइडेंट ग्रुप के दफ्तर के बाहर आप कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने कंपनी परिसर की दीवारों पर ‘गद्दार’ जैसे नारे लिखकर अपनी नाराजगी जताई थी
राजनीतिक हलकों में पहले से ही यह चर्चा थी कि पार्टी बदलने के बाद गुप्ता के औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर सरकारी एजेंसियों की नजरें टेढ़ी हो सकती हैं। पीपीसीबी की इस ताजा कार्रवाई को भी उसी कड़ी में देखा जा रहा है। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर इसे नियमित निरीक्षण बताया जा सकता है लेकिन समय और परिस्थितियां इसे राजनीतिक रंग दे रही हैं।
दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्राईडेंट यूनिट के खिलाफ लंबे समय से जल और वायु प्रदूषण की शिकायतें की जा रही थीं। ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्टरी से निकलने वाले अपशिष्ट और धुएं के कारण आसपास के क्षेत्र में पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। उनका यह भी कहना है कि उद्योगपति की राजनीतिक पहुंच के कारण अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है। उद्योग जगत के जानकार इस घटनाक्रम को दो नजरियों से देख रहे हैं। एक ओर इसे पर्यावरण नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे राजनीतिक दबाव की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
अब सबकी नजरें पीपीसीबी की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सकेगा कि कार्रवाई महज औपचारिक थी या वास्तव में पर्यावरणीय उल्लंघनों के ठोस सबूत सामने आए हैं। फिलहाल ट्राइडेंट पर हुई इस रेड ने पंजाब की सियासत में नए सवाल खड़े कर दिए हैं और उद्योग-राजनीति के रिश्तों पर बहस को फिर से तेज कर दिया है।
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