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    Home»देश»नफरती भाषण समाज के लिए गंभीर खतरा, पर वर्तमान कानून पर्याप्त : सुप्रीम कोर्ट
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    नफरती भाषण समाज के लिए गंभीर खतरा, पर वर्तमान कानून पर्याप्त : सुप्रीम कोर्ट

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comApril 30, 2026No Comments4 Views
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    नई दिल्ली, 30 अप्रैल (ता)। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नफरती भाषण और अफवाह फैलाना
    समाज के लिए गंभीर खतरा है, लेकिन ऐसे मामलों से निपटने के लिए पहले से मौजूद कानून पर्याप्त हैं, जरूरत सिर्फ उनके सही तरीके से पालन की है। शीर्ष अदालत ने मामले में अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी करने से इन्कार करते हुए साफ किया कि मौजूदा कानूनों में कोई खालीपन नहीं है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि नए आपराधिक कानून बनाना अदालत का काम नहीं है। यह जिम्मेदारी संसद और विधानसभाओं की है। अदालत कानून की व्याख्या कर सकती है, उसका पालन सुनिश्चित करा सकती है, पर वह सरकार को नया कानून बनाने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। नफरती भाषण देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिकाओं पर फैसले में पीठ ने कहा, ऐसे भाषणों से भाईचारा, सम्मान एवं सांविधानिक व्यवस्था प्रभावित होती है। लिहाजा, सरकार व विधायिका समय-समय पर बदलते हालात को देखते हुए नए कानून या नीतियों पर विचार कर सकते हैं। पीठ ने कहा, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और पहले की दंड प्रक्रिया संहिता में इनसे निपटने के लिए पर्याप्त प्रावधान हैं। कोर्ट ने दोहराया, किसी संज्ञेय अपराध की सूचना पर पुलिस के लिए एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। यह सिद्धांत पहले ललिता कुमारी मामले में तय किया जा चुका है। याचिकाओं में ऐसे मामलों से निपटने के लिए तंत्र बनाने की भी मांग की गई थी।

    but existing laws are adequate: Supreme Court Court Order Desh Hate speech poses a serious threat to society New Delhi tazza khabar tazza khabar in hindi
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