नई दिल्ली, 29 अप्रैल (ता)। वाणिज्य मंत्रालय के तहत काम करने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय ने देश से 25 लाख टन अतिरिक्त गेहूं के निर्यात की अनुमति देने के सरकार के फैसले को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित कर दिया है। केंद्र सरकार ने 20 अप्रैल को देश में गेहूं के पर्याप्त स्टॉक और आगामी रबी सीजन में एक और मजबूत पैदावार की संभावनाओं को देखते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला लिया था।
इस नई खेप की मंजूरी मिलने के बाद, देश से अब तक कुल 50 लाख टन गेहूं और 10 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात को हरी झंडी मिल चुकी है। गौरतलब है कि सरकार ने इससे पहले इसी साल जनवरी महीने में 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी। इसके बाद, फरवरी में अतिरिक्त 5 लाख टन गेहूं उत्पादों और 25 लाख टन गेहूं को निर्यात के लिए मंजूर किया गया था।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने अपनी हालिया अधिसूचना में नीतिगत स्थिति को साफ करते हुए कहा है कि गेहूं की निर्यात नीति… प्रतिबंधित बनी हुई है। हालांकि, अतिरिक्त 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं के निर्यात की अनुमति दी जाती है। महानिदेशालय ने यह भी साफ किया है कि इस निर्यात के लिए विस्तृत नियम और प्रक्रियाएं एक अलग आदेश के जरिए जल्द ही अधिसूचित की जाएंगी।
निर्यात नीतियों में इस ढील के पीछे कृषि क्षेत्र के उत्साहजनक आंकड़े एक बड़ा कारण हैं। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी किए गए दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार : फसल वर्ष 2025-26 (जुलाई-जून) के लिए देश का कुल गेहूं उत्पादन 120.2 मिलियन टन रहने का अनुमान है। उत्पादन में इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण बुवाई के रकबे में हुआ इजाफा है। साल 2026 के रबी सीजन के दौरान गेहूं की बुवाई का रकबा बढ़कर 33.41 मिलियन हेक्टेयर हो गया है, जो कि एक साल पहले की समान अवधि में 32.80 मिलियन हेक्टेयर था। कुल मिलाकर, रबी सीजन में बढ़े हुए रकबे और 120.2 मिलियन टन उत्पादन के अनुमान ने घरेलू बाजार में अनाज की उपलब्धता को लेकर सरकार का भरोसा बढ़ाया है। एक तरफ जहां देश का अपना खाद्य भंडार सुरक्षित स्थिति में है, वहीं दूसरी तरफ इस अतिरिक्त निर्यात मंजूरी से वैश्विक बाजार में भी भारतीय गेहूं की उपस्थिति मजबूत होगी और जरूरतमंद देशों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में भारत की भूमिका बनी रहेगी।
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