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    Home»देश»अनचाहा गर्भ अधिकारों का उल्लंघन : सुप्रीम कोर्ट
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    अनचाहा गर्भ अधिकारों का उल्लंघन : सुप्रीम कोर्ट

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comApril 25, 2026No Comments6 Views
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    नई दिल्ली 25 अप्रैल। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि कोई भी अदालत किसी महिला, खासकर नाबालिग को उसकी इच्छा के विपरीत गर्भ रखने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। अदालत ने यह टिप्पणी तब की, जब 15 वर्षीय एक किशोरी को सात माह के गर्भ को चिकित्सकीय तरीकों से समाप्त करने की अनुमति दी गई। अदालत ने जोर देकर कहा कि अनचाही गर्भावस्था के लिए किसी महिला को मजबूर करना, उसके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगा।

    जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने यह आदेश दिया। अदालत ने कहा कि गर्भवती की इच्छा क्या है यह बात मायने रखती है, न कि गर्भ में पल रहे बच्चे की। कोर्ट ने यह भी कहा कि अपने शरीर से जुड़े निर्णय लेने का अधिकार, विशेषत: गर्भधारण के मामले में, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत आजादी और निजता का हिस्सा है।

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी महिला को उसकी इच्छा के खिलाफ गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर किया जाता है, तो यह उसके संवैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन होगा।

    संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्ति को अपनी जिंदगी और निजी स्वतंत्रता का अधिकार मिला हुआ है, जिसमें अपने शरीर से जुड़े फैसले लेने का अधिकार भी शामिल है।

    अदालत ने जोर देकर कहा कि यह अधिकार खासकर तब और महत्वपूर्ण हो जाता है, जब मामला नाबालिग और अनचाही गर्भावस्था से जुड़ा हो।

    अनचाही गर्भावस्था थोपना मानसिक विनाश का कारण
    सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी बताया कि ऐसी परिस्थितियों में गर्भावस्था जारी रखना नाबालिग के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई, सामाजिक स्थिति और उसके पूरे भविष्य पर गंभीर असर डाल सकता है।

    अदालत ने कहा कि किसी को यह कहना आसान होता है कि अगर महिला बच्चा नहीं पालना चाहती तो उसे गोद दे सकती है, लेकिन यह तर्क पूरी तरह से असंवेदनशील और अव्यवहारिक है।

    अनचाहे बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर करना, महिला के हितों को नजरअंदाज करना है और उसके जीवन को दूसरे दर्जे पर रखना है।

    अदालत ने चेतावनी भी दी कि अगर कोर्ट ऐसे मामलों में राहत देने से इनकार करेगा, तो लोग मजबूर होकर गैरकानूनी और खतरनाक तरीकों का सहारा लेंगे, जिससे महिलाओं की जिंदगी और ज्यादा खतरे में पड़ जाएगी।

    इस मामले में यह भी सामने आया कि 15 साल की इस बच्ची ने दो बार अपनी जिंदगी खत्म करने की कोशिश की थी, जो यह दिखाता है कि वह किस मानसिक दबाव से गुजर रही थी।

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