कानपुर 25 अप्रैल। उत्तर प्रदेश के जनपद कानपुर में सेवानिवृत्त उप आयुक्त (उद्योग) और उनकी पत्नी को उन्ही के घर पर डिजिटल अरेस्ट (बंधक) कर साइबर ठगों ने महज नौ दिनों में तीन बार में 57 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में आरटीजीएस के माध्यम से स्थानांतरित करा लिए गए। ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने साइबर क्राइम में जाकर तहरीर दी। जिस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने पांच शातिरों को धर दबोचा है। जबकि गिरोह का सरगना केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) का कर्मचारी है जो उड़ीसा के राउरकेला में पोस्टेड है। जिसे जल्द ही पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने शुक्रवार को बताया कि रिटायर्ड डिप्टी कमिश्नर (उद्योग) भैरव प्रसाद पांडेय अपनी पत्नी मीरा पांडेय के साथ रामबाग इलाके में रहते हैं। इसके अलावा उनके दो बेटे भी हैं जो मुंबई और स्विट्जरलैंड में रहते हैं। पीड़ित ने बताया कि 10 अप्रैल उनके पास व्हाट्सएप्प के जरिए एक कॉल आई। जिसने उनसे कहा गया कि यह कॉल पहचान एंटी करप्शन ब्यूरो की ओर से की गई।
आपकी पत्नी के आधार कार्ड से पुलवामा आतंकी हमले के मुख्य आरोपित के खाते में 70 लाख रुपये भेजे गए हैं। इस आधार पर उन्हें एवं उनके परिवार को गिरफ्तार करने की धमकी दी गई। इसके पश्चात वीडियो कॉल के माध्यम से वर्दीधारी व्यक्ति एवं अन्य लोगों को दिखाकर विश्वास पैदा किया गया तथा जांच प्रक्रिया के नाम पर विभिन्न बैंक खातों में धनराशि जमा करने के लिए बाध्य किया गया। 18 अप्रैल आने तक भय एवं दबाव में आकर प्रार्थी द्वारा कुल सत्तावन लाख रुपये विभिन्न खातों में आरटीजीएस के माध्यम से स्थानांतरित करा लिए गए।
जांच में सामने आया कि शातिरों के बैंक खातों में 57 लाख और 48 लाख का लेनदेन हुआ है। हालांकि उस धनराशि को फ्रीज नहीं कराया जा सका है। यह एक अंतरराष्ट्रीय ठगी का गिरोह है। साइबर ठगों के तार देश के पांच राज्यों से जुड़े हैं। इस गिरोह का मास्टरमाइंड ओडिशा के राउरकेला में तैनात दाऊद अंसारी है जो सीआईएसएफ जवान है। पुलिस अब सीआईएसएफ जवान समेत अन्य फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।
पकड़े गए शातिराें ने बताया कि उन्हें दाऊद के द्वारा ऐसा बताया गया था कि अपना बैंक अकाउंट यदि वह किराए पर देंगे तो उन्हें उसके बदले कमीशन मिलेगा। उन खातों में हवाला, जीएसटी और पॉलिटिकल पार्टियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाला पैसा आएगा। इसी लालच में आकर वह फंस गए।
पकड़े गए साइबर ठगों की पहचान जय प्रकाश, सुभांकर सिंह, विक्रम सिंह, विनय प्रताप सिंह और झारखंड का रहने वाला वाला राजू ठाकुर है। शातिरों के पास से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज, फर्जी दस्तावेज, कार और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद हुए हैं।

