मथुरा 23 अप्रैल। ब्रजवासियों का संघर्ष अब साकार होता नजर आ रहा है। मथुरा-वृंदावन रेल लाइन के स्थान पर फोरलेन सड़क बनाने की प्रक्रिया अब और आगे बढ़ गई है। रेलवे और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने सर्वे के बाद रेलवे की 35 हेक्टेयर भूमि का मूल्यांकन किया है। करीब 400 करोड़ रुपये से यह भूमि खरीदी जाएगी। प्रस्ताव तैयार करके रेलवे की सहमति के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया है।
सब कुछ ठीक रहा तो हरी झंडी मिलने पर भूमि खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। मथुरा-वृंदावन का रेल ट्रैक करीब 150 वर्ष पुराना है। करीब दो दशक पहले यहां से ट्रेन का आवागमन बंद कर दिया गया। इसके बाद रेल बस का संचालन किया गया।
मथुरा जंक्शन से वृंदावन तक रेल बस से यात्री आते-जाते थे। वर्ष 2022 में रेलवे ने इस रेल ट्रैक को ब्राडगेज करने की योजना बनाई और मथुरा से वृंदावन के बीच हर 15 मिनट में ट्रेन चलाने की कार्ययोजना तैयार की।
लेकिन ट्रैक पर कई स्थानों पर अंडरपास और फुट ओवरब्रिज बनाए जाने थे। इससे शहर दो हिस्सों में बंट जाता। शहर का विकास रुकता, जलभराव और जाम की समस्या अलग होती। ब्रजवासियों ने इस मर्म को समझा और फिर आंदोलन की हुंकार भर दी। तर्क किया कि इस पर सड़क बनाई जाए। भविष्य में एलिवेटेड मेट्रो रेल ट्रैक बनाया जा सकता है। सांसद हेमा मालिनी की पहल पर रेल अधिकारियों से वार्ता हुई।
कई दौर की वार्ता और सैकड़ों पत्राचार के बाद आखिर वर्ष 2025 में रेलवे ने रेल ट्रैक को स्थाई रूप से बंद करने की घोषणा कर दी। इस पर तब से सड़क बनाने की मांग हो रही थी। लोक निर्माण विभाग को रेलवे ने भूमि भी हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की है।
बीते सात मार्च को सीएम योगी आदित्यनाथ मथुरा आए तो फोरलेन की दिशा में काम तेज करने का निर्देश दिया। रेलवे और जिला प्रशासन के संयुक्त सर्वे में 35 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है। इसकी कीमत चार सौ करोड़ रुपये आंकी गई है।
रेलवे की सहमति के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। वहां से सहमति के बाद सरकार धनराशि भुगतान की प्रक्रिया शुरू करेगी।
इसी फोरलेन सड़क के ऊपर भविष्य में एलिवेटेड रेल ट्रैक बनाने की योजना है। इस ट्रैक पर ट्रेन या फिर मेट्रो रेल चलाई जा सकती है। हालांकि इस पर अभी केवल विचार हो रहा है।

