जैसे जैसे २०२७ में होने वाले विधानसभा चुनावों का समय नजदीक आता जा रहा है वैसे वैसे प्रदेश की सरकार सीएम योगी के नेतृत्व में मतदाताओं नेताओं व कार्यकर्ताओं को जोड़ने के लिए प्रयास शुरु कर चुकी है। पिछले लगभग चार साल में जिन निगम आदि के पदों पर बैठने का इंतजार बड़े नेता कर रहे थे तथा स्थानीय नेताअेां का सरकारी कमेटियों में प्रतिनिधित्व मिलने की उम्मीद थी वो अब जल्द पूरी होगी क्योंकि खबरों के अनुसार प्रदेश सरकार अब निगमों और अन्य सरकारी पदों पर पार्टी व सहयोगी दलों का बैठाने का काम करेगी। वैसे ही जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक की सरकारी कमेटियेां में कार्यकर्ताओं को प्रतिनिधित्व मिलेगा। अब इन लडडुओं का भोग कौन खाएगा यह तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा लेकिन कई दिनों से यूपी मंत्रिमंडल विस्तार की जो चर्चाएं चल रही थी वो भी लगता है कि अब पूरी होने वाली है। जानकारों का मानना है कि भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी के साथ ही कुछ एमएलसी व विधायकों को मौका मिल सकता है। क्योंकि कैबिनेट मंत्री जितिन प्रसाद और राज्यमंत्री अनूप वाल्मिकी के संसद जाने पर भी कोई मंत्री बनेगा। चर्चा है कि जिन विधायकों को विशेष काम सौंपे गए उन्हें पुरस्कार दिया जाएगा। यह बात अगर सही है तो हिमाचल व पश्चिम बंगाल चुनावों में जुटे नेताओं में एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज जैसे नेताओं को भी मौका मिल सकता है। जानकारों का कहना है कि इस मामले में यूपी के प्रभारी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह आदि से भी दिल्ली जाकर चर्चा कर चुके हैं।
इस मंत्रिमंडल विस्तार में सब सही चला तो सहयोगी दल रालोद के एक विधायक को मंत्रिपद और कुछ नेताओं को निगमों की बागडोर मिल सकती है। इस बात का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि पीएम मोदी और सीएम योगी निरंतर पश्चिमी उप्र में रालोद मुखिया जयंत चौधरी के साथ मंच साझा कर रहे हैं और उन्हें प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है। पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय जाट संसद द्वारा महाराजा सूरजमल की प्रतिमा का अनावरण करने आए पंजाब के सीएम भगवंत मान द्वारा जो टिप्पणी की गई और भाजपा के जाट नेताओं को असहज किया था उसकी भरपाई के लिए जरुरी हैकि जयंत को खुश कर जाट समाज में बनी पुरानी पैठ को बनाए रखना चर्चा है कि लोकसभा में रालोद दल के नेता बागपत सांसद वेस्ट यूपी में जनमानस की समस्याएं निस्तारण करा रहे लोकसभा में निरंतर मुददे उठा रहे डॉ राजकुमार सांगवान को भी केंद्र या प्रदेश में किसी निगम का अध्यक्ष या चेयरमैन बनाने केसाथ ही उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि मंत्रिमंडल विस्तार में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और यूपी के सीएम योगी सभी तरह के समीकरण बनाकर चलने की कोशिश करेंगे और निगमों के खाली पदों को भरा जाएगा और सहयोगी दलों को साधे रखने के लिए रालोद को हर स्तर पर प्राथमिकता मिलेगी। अब बस इंतजार का बांध नेताओं का टूटता सा लग रहा है। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि चुनाव तक काम करने का मौका देने के लिए अब मंत्रिमंडल विस्तार और निगमों में नियुक्ति के मामले में भाजपा देर नहीं करेगी। बाकी राजनीति में कब क्या हो जाए। बताते चलें कि करीब ३६ आयोगों और निगमों में मिलने वाले पद राज्यमंत्री के दर्जे के समान होते हैं और जिन नेताओं को कमेटियों में स्थान मिलता है उनका भी काफी कद बढ़ जाता है।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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