Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • दिल्ली से हरिद्वार-ऋषिकेश तक दौड़ेगी नमो भारत? 3 घंटे में तय होगी दूरी
    • सपा नेता आईपी सिंह पर एफआईआर बोले-सरकार आपकी, फांसी पर चढ़ा दें
    • यूपी की फाइनल वोटर लिस्ट जारी, 84 लाख मतदाता बढ़े
    • फर्जी सैलरी स्लिप के जरिए बैंक से लिया करोड़ों का पर्सनल लोन, 5 गिरफ्तार
    • स्कोडा की कारों पर लाखों रुपये के डिस्काउंट ऑफर मिल रहे
    • अक्ल पर ताला लगा रहा एआई! खत्म हो रही इंसानों की तर्क-शक्ति
    • सरकार और निर्माणकर्ता असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को दे मुआवजा लेकिन एफआईआर उचित नहीं
    • सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को सरकार दुकानें बनाकर देने के साथ दे आर्थिक मदद, दोषी अफसरों को भी भेजा जाए जेल, एक व्यक्ति को दी जाए नौकरी, बाजार बंद ने स्पष्ट किया कि हर कोई व्यापारी के साथ है
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»47 करोड़ साल पहले पौधे का हुआ जन्म! 10 वृक्ष एक पुत्र की महिमा को बढ़ाने और शुद्ध पर्यावरण के लिए वृक्ष लगायें उपहार में बुके के स्थान पर भेंट करें तुलसा के पौधे
    देश

    47 करोड़ साल पहले पौधे का हुआ जन्म! 10 वृक्ष एक पुत्र की महिमा को बढ़ाने और शुद्ध पर्यावरण के लिए वृक्ष लगायें उपहार में बुके के स्थान पर भेंट करें तुलसा के पौधे

    adminBy adminApril 8, 2026No Comments5 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    वर्तमान में अपने देश में अरबों पेड़ पौधे लहलहाते और नागरिकों को स्वच्छ हवा और ऊर्जा प्रदान करते नजर आते हैं सब तरह के प्रदूषण से आम आदमी को बचाने और स्वस्थ रखने के लिए सरकारें भी युद्धस्तर पर देश भर में वृक्षारोपण अभियान भी चलाये जा रहे हैं अकेले यूपी में 9 साल में कई सौ करोड़ के आसपास पौधारोपण हो चुके हैं। वर्तमान समय में वृक्षों का महत्व हर क्षेत्र और हर तरीके से हैं इन्हें 10 वृक्ष एक पुत्र समान की संज्ञा भी दी गयी है मगर इस संदर्भ में छपी एक खबर के अनुसार डायनासोरों के पृथ्वी पर आने से बहुत पहले, धरती आज जैसी नहीं थी। लगभग 50 करोड़ वर्ष पहले तक पृथ्वी की सतह का अधिकांश हिस्सा बंजर चट्टानों और सूखी मिट्टी से ढका हुआ था। न पेड़ थे, न घास और न ही फूल जीवन लगभग पूरी तरह से महासागरों तक ही सीमित था। फिर एक अद्भुत घटना घटी और धरती पर पौधों का जन्म हुआ, जिसने इस ग्रह की दिशा ही बदल दी।
    पौधों की कहानी पानी से शुरू होती है। शुरुआती पौधे बहुत छोटे और हरे जीव जैसे थे, जिन्हें हम आज शैवाल (एल्गी) के रूप में जानते हैं। ये सूर्य के प्रकाश, पानी और कार्बन डाइऑक्साइड की मदद से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहा जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि लगभग 47 करोड़ वर्ष पहले वास्तविक पौधे हरे शैवाल से विकसित हुए। ये शुरुआती पौधे उथले जल में, या समुद्र के किनारों पर उगते थे, जहां कभी पानी में डूबे रहते और कभी हवा के संपर्क में आते। यही परिस्थितियां उन्हें धीरे-धीरे जमीन पर जीवन के लिए तैयार करती रहीं पर जमीन पर उन्हें कई कठिन सवालों का सामना करना पड़ा जैसे सूखने से कैसे बचें? सीधे कैसे खड़े रहें? और सूखी मिट्टी से पानी व पोषक तत्व कैसे प्राप्त करें? इनसे निपटने के लिए पौधों ने कई महत्वपूर्ण बदलाव किए। उन्होंने अपने ऊपर मोम जैसी परत (क्यूटिकल) विकसित की, जिससे पानी का नुकसान कम हुआ मजबूत कोशिका दीवारें बनीं, जिससे वे सीधे खड़े रह सके। साथ ही जड़ जैसे सरल ढांचे (राइजॉइड्स) विकसित हुए, जो उन्हें जमीन से जोड़ते और पानी व खनिजों को अवशोषित करने में मदद
    करते। धीरे-धीरे पौधों की जड़ें चट्टानों को तोड़ने लगीं और उनसे निकलने वाले खनिजों ने बंजर मिट्टी को उपजाऊ बनाया। पौधों ने वातावरण में ऑक्सीजन भी बढ़ाई, जिससे हवा शुद्ध हुई और सांस लेना आसान हुआ। लगभग 42 करोड़ वर्ष पहले पौधों में संवहनी ऊतक (वेस्कुलर टिशू) विकसित हुए, ऐसी छोटी-छोटी नलिकाएं, जो पानी और पोषक तत्वों को पूरे पौधे में पहुंचाती थीं। इससे पौधे लंबे व मजबूत बने।
    इसके बाद हुआ बीजों का विकास। लगभग 38 करोड़ वर्ष पहले। बीजों ने पौधों के भ्रूणों को सुरक्षा दी और उन्हें कठोर परिस्थितियों में भी जीवित रहने में मदद की। फिर करीब 14 करोड़ वर्ष पहले फूलों वाले पौधों (एंजियोस्पर्म) का उदय हुआ। फूलों ने कीड़ों और पक्षियों को आकर्षित किया, जिससे परागण आसान हुआ। आज हम जो पेड़, घास, फल और सब्जियां देखते हैं, वे इसी विकास की देन हैं और इस परिवर्तन के असली नायक हैं पौधे। वर्तमान सुविधाएं जुटाने और बड़े-बड़े आलीशान महल या मॉल बनाने और उनमें एक से एक बढ़िया फर्नीचर दिखाने के लिए जिस प्रकार से पेड़ों की कटाई हो रही है उसमें भारी तादाद में वृक्षारोपण के बावजूद शुद्ध हवा और नागरिकों को एनर्जी देने के मामले में काफी कमी महसूस की जा रही है।
    लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि इनको ंबचाने और लगाने के लिए कुछ नहीं हो रहा अगर गूगल पर जाकर देखा जाये तो देश में गरीब ग्रामीणों से लेकर बड़े-बड़े पर्यावरणविदों के द्वारा चाहे वह महिला-पुरूष व बच्चें शामिल हैं उनके द्वारा स्वयं के प्रयास और खर्चों से बड़े-बड़े वन तैयार कर दिये गये हैं कई अभी गुमनाम है मगर कई को इस संदर्भ में देश के सर्वोच्च सम्मान मिल चुके हैं और हर व्यक्ति को वृक्ष लगाने की प्रेरणा से युक्त फिल्मों के निर्माण हो चुके हैं बताते हैं कि एक वृक्ष कई लोगों को ऊर्जा प्रदान करता है और उनके जीवन को सुरक्षित और निरोगी बनाने का काम करता है।
    गुरु जम्भेश्वर महाराज जी ने दिया संदेश
    इस क्षेत्र में कई सौ साल पूर्व सर्वप्रथम गुरू जम्भेश्वर जी महाराज जो बिश्नोई समाज के गुरू भी है के द्वारा पेड़ पौधों और जीव जन्तुओं को बचाने के लिए अभियान चलाया गया जिसके तहत एक पेड़ को बचाने के लिए 365 महिलाओं ने अपनी गर्दन कटा दी थी। दुनिया को पर्यावरण और जीव-जन्तु और पेड़ों को बचाने का यह प्रयास शुरू हुआ और उसके बाद पद्मश्री चिपको आंदोलन के प्ररेणता बहुगुणा जैसे अनेकों पर्यावरणविद सामने आये।
    सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए ने तुलसी का पौधा भेंट करने की परंपरा को बढ़ाया आगे
    वर्तमान में सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए देश के पहले संगठन ने अपने आयोजनों और उपहारों में तुलसा का पौधा भेंट करने की परम्परा को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके संस्थापक सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए के संस्थापक राष्ट्रीय महामंत्री मजीठिया बोर्ड यूपी के पूर्व सदस्य अंकित बिश्नोई का कहना है कि तुलसा का पौधा जहां घर के वातावरण को शुद्ध रखता है वहीं अनेक बीमारियों से भी छुटकारा दिलाता है और जिस घर में यह पौधा होता है वहां खुशहाली का सामराज्य होता है कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि अपनी सुविधाओं के लिए आवश्यकतानुसार उम्र पूरी हो जाने पर पेड़ों को काटा जाये तो एक की जगह 10 पेड़ लगाये जाये जिससे देश में कहीं भी शुद्ध ऑक्सीजन नागरिकों को मिलने में कमी ना हो और इनसे निकली शुद्ध हवा हर प्रकार के प्रदूषण और गंदगी के असर को नष्ट करती रहे और नागरिक खुशहाल और स्वस्थ रहें। मेरा मानना है कि हम जो बड़े बड़े बुके हर शुभ अवसर पर भेंट करते हैं उस परम्परा से हटकर उपहार में वह पौधें दें जो घरों के लिए शुभ होते हैं और पर्यावरण भी संतुलन बनाते हैं और यह 100 प्रतिशत अटल कह सकते हैं कि जो पौधा भेंट किया जा रहा वह जरूर कहीं लगेगा और मानव जाती को कई प्रकार के लाभ इससे मिलेंगे जबकि महंगे महंगे बुके और फूलमालाएं कुछ ही मिनटों और घंटों के बाद कूडे के ढेर में दिखाई देंगी क्योंकि इनसे जो मच्छर पैदा होते हैं वह जीना हराम कर देते हैं। हां अगर जरूरी समझा जाये तो एक दो मालाएं मंगाई जाये समरोह के दौरान वहीं पहनाई जाये तो इनसे उत्पन्न होने वाले मच्छर भी समाप्त होंगे और धन भी बचेगा जिसे हम किसी अच्छे काम में लगा सकते हैं।
    (प्रस्तुतिः-रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

    sampadkiya tazza khabar tazza khabar in hindi
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    दिल्ली से हरिद्वार-ऋषिकेश तक दौड़ेगी नमो भारत? 3 घंटे में तय होगी दूरी

    April 10, 2026

    सपा नेता आईपी सिंह पर एफआईआर बोले-सरकार आपकी, फांसी पर चढ़ा दें

    April 10, 2026

    यूपी की फाइनल वोटर लिस्ट जारी, 84 लाख मतदाता बढ़े

    April 10, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.