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    Home»चुनाव»मतुआ वोट ननद-भाभी की लड़ाई में बना निर्णायक
    चुनाव

    मतुआ वोट ननद-भाभी की लड़ाई में बना निर्णायक

    adminBy adminApril 4, 2026No Comments3 Views
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    कोलकाता, 04 अप्रैल (अम)। पश्चिम बंगाल की उत्तर 24 परगना की बागदा सीट पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो चला है। भाजपा के सोमा ठाकुर का मुकाबला तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी मधुपर्णा ठाकुर से है। सोमा केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर की पत्नी हैं, जबकि मधुपर्णा रिश्ते में उनकी ननद लगती है। इससे मुकाबला भावनात्मक और प्रतीकात्मक दोनों ही स्तरों पर महत्वपूर्ण हो गया है।
    ननद-भाभी की इस लड़ाई में मतुआ समुदाय का वोट निर्णायक बन गया है। शांतनु ठाकुर के परिवार का इस समुदाय के बीच खासा प्रभाव माना जाता है, जिससे यह चुनाव और भी अहम हो गया है। इस मुकाबले से एक ही परिवार के भीतर दो अलग राजनीतिक विचारधाराएं आमने-सामने हैं-एक भाजपा के साथ, दूसरी तृणमूल के साथ।
    भाजपा ठाकुर उपनाम और मतुआ पहचान के सहारे वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रही है। सोमा का उम्मीदवार बनना भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
    मतुआ समुदाय की नींव 19वीं सदी में समाज सुधारक हरिचंद ठाकुर ने रखी थी, जिसे उनके पुत्र गुरुचंद ठाकुर ने मजबूत किया। यह आंदोलन मूलतः दलित-नामशूद्र समुदाय के सामाजिक और धार्मिक उत्थान से जुड़ा था। बांग्लादेश (पूर्वी पाकिस्तान) से आए शरणार्थियों के बीच इस समुदाय का गहरा प्रभाव रहा है। ठाकुर परिवार, जिसे आम तौर पर ठाकुरबाड़ी कहा जाता है, इस आंदोलन का केंद्र रहा है। इस परिवार का राजनीतिक प्रभाव आज भी बरकरार है।
    बंगाल की राजनीति में मतुआ समुदाय को किंगमेकर माना जाता है। 2 से 3 करोड़ मतुआ वोटरों का असर करीब 60 से 70 सीटों पर पड़ता है। बागदा, बोनगांव, ठाकुरनगर और आसपास के क्षेत्रों में इनकी निर्णायक भूमिका होती है। भाजपा ने सीएए और शरणार्थी मुद्दों से समुदाय में पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है। बता दें कि, बागदा विधानसभा सीट लगातार तीन बार से तृणमूल कांग्रेस के कब्जे में है।

    Desh kolkata Matua Vote Proves Decisive in the Battle Between Sister-in-Law and Sister-in-Law Political tazza khabar tazza khabar in hindi
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