लखनऊ 16 मार्च। होम्योपैथी विभाग कार्यवाहकों के सहारे चल रहा है। निदेशक से लेकर अन्य सभी प्रशासनिक पदों पर लंबे समय से विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक नहीं हुई। ऐसे में पदोन्नति से भरे जाने वाले सभी पद खाली हैं। होम्योपैथी चिकित्साधिकारी एक ही पद पर 10 से 20 वर्ष तक कार्य कर रहे हैं।
प्रदेश में निदेशक के रूप में शासन स्तर से प्रमोद कुमार सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन इस पद पर 2022 के बाद से डीपीसी नहीं हुई है। इसी तरह अपर निदेशक के दो पद हैं। इसमें एक चिकित्सा तो दूसरा होम्योपैथी शिक्षा संवर्ग का है। ये दोनों पद भी लंबे समय से खाली हैं। संयुक्त निदेशक के चार पदों में तीन चिकित्सा संवर्ग और एक शिक्षा संवर्ग का है। इन तीनों पदों पर भी डीपीसी नहीं हो पा रही है। इसी तरह उपनिदेशक स्तर के चार पद भी डीपीसी के अभाव में खाली हैं नी मंडलीय होम्योपैथी अधिकारी और मुख्य चिकित्साधिकारी के पद भी रिक्त चल रहे हैं। जिला होम्योपैथी अधिकारी के 40 पदों पर कार्यवाहकों को जिम्मेदारी देकर काम चलाया जा रहा है। हालत यह है कि कई जिलों में कार्यवाहक जिला होम्योपैथी अधिकारी की तैनाती भी मनमानी तरीके से की गई है। वरिष्ठ होम्योपैथी अधिकारियों को नजर अंदाज करके कनिष्ठ अधिकारियों को कार्यवाहक की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। इस मामले को लेकर पिछले दिनों प्रांतीय होम्योपैथी चिकित्सा सेवा संघ ने निदेशक से लेकर प्रमुख सचिव और आयुष मंत्री तक को ज्ञापन सौंपा मांग की कि पदोन्नति के जरिए भरे जाने वाले पदों पर नियमानुसार डीपीसी कराई जाए और खाली पदों को भरा जाए, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई कार्य नहीं हो सका है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
आयुष प्रमुख सचिव रंजन कुमार का कहना है कि डीपीसी की प्रक्रिया चल रही है। वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट तैयार • कराई गई है। निदेशालय स्तर से वरिष्ठता सूची तैयार हो गई है। अन्य प्रक्रियाएं भी करीब-करीब पूरी हो गई हैं। जल्द ही पदोन्नति के जरिए सभी पदों को भर दिया जाएगा।

