लखनऊ, 12 मार्च (जा)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अंसल समूह की 313.12 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है। अंसल प्रापर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उसके प्रमोटरों से जुड़ी संपत्ति को ईडी ने मनी लान्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अस्थायी तौर पर कुर्क किया है। कुर्क की गई संपत्ति में आगरा में स्थित लगभग 9.08 हेक्टेयर आवासीय भूमि शामिल है।
ईडी के अनुसार यह कार्रवाई अंसल समूह के खिलाफ चल रही मनी लान्ड्रिंग के आरोप की जांच के तहत की गई है। जांच में सामने आया है कि अंसल समूह के प्रमोटरों ने लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी प्रोजेक्ट के नाम पर ग्राहकों से बड़ी रकम जुटाई और उसका पूरा इस्तेमाल परियोजना में न करके दूसरे मदों में किया। इस मामले में अंसल समूह के प्रमोटरों उसके निदेशकों के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात, साजिश और जालसाजी जैसे आरोपों में विभिन्न थानों में 278 एफआइआर दर्ज हैं। इन एफआईआर में परियोजना में फ्लैटों की डिलीवरी न होने और ग्राहकों से जुटाए गए धन के डायवर्जन का आरोप लगाया गया है।
ईडी की जांच में पता चला कि सुशांत गोल्फ सिटी परियोजना के नाम पर 1,234.92 करोड़ रुपये ग्राहकों से अग्रिम के रूप में वसूले गए, लेकिन इसमें से 921.80 करोड़ रुपये ही परियोजना से जुड़े परिसंपत्तियों के निर्माण में लगाए गए। शेष 313.12 करोड़ रुपये को अन्य गैर-परियोजना गतिविधियों में डायवर्ट कर दिया गया।
ईडी के मुताबिक अपराध से अर्जित मूल संपत्तियां उपलब्ध न होने के कारण बराबर मूल्य की वैकल्पिक संपत्तियों को कुर्क किया गया है, जो आगरा में स्थित हैं और अंसल समूह से जुड़ी कंपनियों के नाम पर दर्ज हैं।
Trending
- 43 डिग्री पार हो सकता है पारा, सुबह से ही तेज धूप ने किया परेशान, इतने दिन राहत के नहीं आसार
- होर्मुज के खतरे को करके पार 20000 टन LPG लेकर भारत पहुंचा ‘सिमी’ जहाज
- 1800 करोड़ी ‘धुरंधर 2’ का दीवाना हुआ पूरा पाकिस्तान… बनी No.-1 ट्रेंडिंग फिल्म, 24 घंटे में OTT पर मिले 20 मिलियन से ज्यादा व्यूज
- 48 घंटे में दूसरी बार बढ़े गैस के दाम, दिल्ली-NCR में आज से और महंगी हुई CNG
- UP: पीठ-हाथ, हथेली और सिर जलाया, बच्चों से क्रूरता नजरअंदाज, चाची ने चारों के साथ पार की थीं बर्बरता की हदें
- बिजनौर जेल में बंद मेरठ के सराफ की मौत, सीने में दर्द और जलन के बाद अचानक बिगड़ी हालत, इस मामले में था बंद
- लो जी अब आंधी में उखड़ गए बिजली के 300 खंभे
- ऑनलाइन के मुकाबले ऑफलाइन परीक्षा ही उचित है सिर्फ पारदर्शिता बनी रहे तो

