बुलंदशहर, 09 मार्च (हि)। जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज ने नगर के डीएवी पीजी कॉलेज में गत दिवस युवा चेतना और आध्यात्मिक मूल्यों का समन्वय विषय पर आयोजित आध्यात्मिक संवाद में कहा कि जो लोग आज दूसरे धर्म में हैं, उनके पूर्वज हिंदू ही थे। यदि उनका डीएनए टेस्ट कराया जाए, तो वह हमसे ही मिलेगा। किन्हीं परिस्थितियों या कारणों के वश कुछ लोग दूसरे पंथों में चले गए थे, लेकिन आज भी वे हमारे बीच ही हैं। भारतवर्ष में हम सभी एक हैं और हमें एक-दूसरे का ख्याल रखना चाहिए। हमारे साझा पूर्वज ही हमारी असली पहचान हैं और इसी भाव के साथ हमें समाज में समरसता बनाए रखनी है।
डीएवी पीजी कॉलेज प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानन्द गिरी, प्राचार्य डा. राजीव सिरोही, प्रबंध समिति सचिव अरुण कुमार गर्ग व पूर्व सचिव अनिल कुमार गर्ग ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। पूरा परिसर स्वामी अवधेशानन्द गिरी के स्वागत में आध्यात्मिक जयघोष से गुंजायमान हो उठा। स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कहा कि भारत और भारतीय संस्कृति पूरे विश्व को अपना परिवार कुटुंब मानती है। जबकि पश्चिम के देश विश्व को बाजार मानते हैं। बाजार की भावना लेकर के ही ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में आई थी। उन्होंने कहा कि आज देश में यह हालात नहीं हैं भारत अब विश्व गुरु बन रहा है। कुंभ में आधा भारत आया था जो हमारी आस्था का पर्व था। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव हुआ है नई शिक्षा नीति को छात्र पढ़ें।
अविमुक्तेश्वरनंद को सुप्रीम कोर्ट ने नहीं माना शंकराचार्य: स्वामी अवधेशानंद गिरी ने पत्रकारों के सवाल पर कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरनंद को सुप्रीम कोर्ट ने शंकराचार्य नहीं माना है। इससे ज्यादा उन्होंने कुछ और नहीं कहा। उन्होंने कहा कि संविधान ने सभी को अधिकार दिए हैं कोई किसी भी प्रकार की यात्रा निकाल सकता है।
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