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    पर्सनल लोन को पछाड़कर गोल्ड लोन बना नंबर 2

    websitemarketing2019@gmail.comBy websitemarketing2019@gmail.comFebruary 28, 2026No Comments11 Views
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    नई दिल्ली 28 फरवरी। सोने पर अब लोग खूब ऋण ले रहे हैं। दिसंबर में समाप्त वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में पर्सनल लोन को पीछे छोड़ते हुए यह आवास के बाद अब दूसरा सबसे बड़ा खुदरा ऋण खंड बन गया है। दिसंबर 2025 तक सोने पर ऋण का पोर्टफोलियो 16.2 लाख करोड़ रुपये था, जबकि पर्सनल लोन का पोर्टफोलियो 15.9 लाख करोड़ रुपये रहा। दूसरी ओर इस अवधि में आवास ऋण का पोर्टफोलियो लगभग 43 लाख करोड़ रुपये के साथ सबसे बड़ा खंड बना रहा। मैक्वेरी कैपिटल के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 24 की पहली तिमाही से उपभोग ऋणों (कंजम्प्शन लोन) में गोल्ड लोन का अनुपात दोगुना हो गया।

    आंकड़े बताते हैं कि गोल्ड लोन में सालाना आधार पर 127 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई है। इसका अंदाजा ऐसे भी लगाया जा सकता है कि अकेले दिसंबर 2025 में देशभर में स्वर्ण आभूषणों को गिरवी रखकर 24061 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया है।

    आरबीआई की मासिक रिपोर्ट में ऋणों से जुड़ा ब्योरा दिया गया है। इसमें बताया गया है कि स्वर्ण आभूषण के बदले लिए गए ऋण में तेजी के पीछे दो मुख्य कारण हैं। पहला, ऐसा कर्ज हासिल करना आसान है। इसके लिए बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान सोने की शुद्धता की जांच करने के बाद आसानी से ऋण जारी कर देते हैं। इसमें कोई बड़ी कागजी कार्रवाई या ग्राहक के सिबिल स्कोर की जांच करने कीआवश्यकता नहीं होती है।

    दूसरा, रिजर्व बैंक ने ऋण से जुड़े नियमों को सरल किया है। 2.5 लाख रुपये तक के छोटे ऋणों में सोने की कीमत का 85 प्रतिशत तक कर्ज दिए जाने का प्रावधान किया गया है। इससे ग्राहकों को ज्यादा धनराशि आसानी से ऋण के तौर पर मिल जा रही है। इसके साथ ही, सोने की ज्वेलरी को गिरवी रखकर लिए गए ऋण की ब्याज दर पर्सनल और क्रेडिट कार्ड पर लिए गए ऋण की तुलना में कम होती है।

    भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि देश भर में सालाना आधार पर स्वर्ण आभूषण के बदले ऋण लेना 127.6 प्रतिशत बढ़ गया है। जबकि वित्तीय वर्ष के आधार पर तुलना की जाए तो 85.5 प्रतिशत का उछाल आया है।

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