नई दिल्ली 24 फरवरी। दुनिया के देशों के साथ भारत के संसदीय संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 64 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों का गठन किया है।
इन समूहों में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसद शामिल हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सांसदों को अपने विदेशी समकक्षों से सीधे बात करने का अवसर देना है। लोकसभा सचिवालय ने कहा है कि यह कदम इस बात का संकेत है कि भारत की संसद विश्व की विभिन्न संसदों के साथ प्रत्यक्ष और नियमित संवाद बढ़ाना चाहती है, ताकि पारंपरिक राजनय के साथ-साथ संसदीय स्तर पर भी मजबूत संबंध बने रहें।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भेजे थे शिष्टमंडल
ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का पक्ष दुनिया के सामने रखने के लिए विभिन्न देशों में बहुदलीय शिष्टमंडल भेजे थे। जिन प्रमुख सांसदों को इन समूहों में शामिल किया गया है उनमें रविशंकर प्रसाद, एम थंबीदुरई, पी चिदंबरम, प्रो राम गोपाल यादव, टी आर बालू, काकोली घोष दस्तीदार, गौरव गोगोई, कनिमोझी करुणानिधि, मनीष तिवारी, डेरेक ओ’ब्रायन, अभिषेक बनर्जी, असदुद्दीन ओवैसी, अखिलेश यादव, के सी वेणुगोपाल, राजीव प्रताप रूडी, सुप्रिया सुले, संजय सिंह, बैजयंत पांडा, डॉ शशि थरूर, निशिकांत दुबे, अनुराग सिंह ठाकुर, भर्तृहरि महताब, डी पुरंदेश्वरी कई अन्य नेता शामिल हैं।
अमेरिका, इजरायल जैसे देशों के नाम शामिल
जिन देशों के साथ ये मैत्री समूह बनाए गए हैं, उनमें श्रीलंका, जर्मनी, न्यूजीलैंड, स्विट्जरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, भूटान, सऊदी अरब, इजरायल, मालदीव, अमेरिका, रूस, यूरोपीय संसद, दक्षिण कोरिया, नेपाल, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जापान, इटली, ओमान, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, सिंगापुर, ब्राज़ील, वियतनाम, मेक्सिको, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। पहले चरण में जहां 64 से देशों के साथ मैत्री समूहों का गठन किया गया है, वहां निकट भविष्य में कई अन्य देशों के साथ इन समूहों के गठन के प्रयास किये जा रहे हैं।

