Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • वाराणसी में बनने वाले बौद्धधाम की जमीन की लीज 99 साल की जाये
    • दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के तुगलकाबाद एक्सटेंशन में पांच मंजिला इमारत में लगी आग
    • सरकार जनहित में सुनिश्चित करें कि उसके निर्देश और अदालतों के फैसले लागू हो सके
    • सिर्फ बाल श्रम निषेध दिवस मनाने से कुछ होने वाला नहीं है, मुक्त कराये गये बच्चों और उनके अभिभावकों की समस्याओं पर भी ध्यान देना होगा
    • फिल्म ‘मां बहन’ प्रियंका चोपड़ा के दिल को छू गई
    • जालंधर का अर्जुन टीम इंडिया के लिए लगाएगा चौके-छक्के, अंडर-19 क्रिकेट टीम में हुआ चयन
    • देश का पहला सीएनजी स्कूटर जल्द होगा लांच
    • यूपी में माफ हुए ट्रैफिक चालान फिर होंगे एक्टिव, कोर्ट के आदेश के बाद परिवहन विभाग का बड़ा फैसला
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»अंतरधार्मिक लिव इन में रहने वालों को संरक्षण का हक : इलाहाबाद हाईकोर्ट
    देश

    अंतरधार्मिक लिव इन में रहने वालों को संरक्षण का हक : इलाहाबाद हाईकोर्ट

    adminBy adminFebruary 24, 2026No Comments2 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    प्रयागराज, 24 फरवरी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंतर धार्मिक विवाह और लिव इन संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि बालिग व्यक्तियों को पसंद के साथी के साथ रहने और विवाह करने का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि संविधान एक जीवंत दस्तावेज है, जो समय के साथ समाज की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को ढालता है।

    कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्मांतरण प्रतिषेध अधिनियम, 2021 अंतरधार्मिक विवाह पर रोक नहीं लगाता। विवाह पंजीकरण अधिकारी केवल इस आधार पर विवाह पंजीकरण से इनकार नहीं कर सकते कि संबंधित पक्षों ने धर्मांतरण के लिए जिला प्राधिकारी से पूर्व अनुमति नहीं ली है। अदालत ने कहा कि ऐसी अनुमति अनिवार्य नहीं बल्कि निर्देशात्मक (डायरेक्टरी) है। इसे अनिवार्य माना जाए तो यह संविधान के अनुच्छेद 14-21 की कसौटी पर खरा नहीं उतरेगा। अंतर धार्मिक विवाह करने या लिव इन रिलेशन में रहने वाले दर्जनों जोड़ों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर संरक्षण देने की मांग की थी। याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने यह निर्णय दिया।

    अदालत ने वर्ष 2019 में जारी राज्य सरकार के उस शासनादेश का हवाला दिया, जिसमें अंतर्जातीय या अंतरधार्मिक विवाह करने वाले जोड़ों को सुरक्षा, सुरक्षित आवास और आवश्यक संरक्षण देने के निर्देश दिए गए थे। अदालत ने कहा कि इस शासनादेश का कड़ाई से पालन किया जाए। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि जीवनसाथी चुनना व्यक्ति की स्वतंत्रता का अभिन्न हिस्सा है और इसमें राज्य या समाज हस्तक्षेप नहीं कर सकते।

    Allahabad High Court live-in relationships tazza khabar tazza khabar in hindi uttar-pradesh news
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    वाराणसी में बनने वाले बौद्धधाम की जमीन की लीज 99 साल की जाये

    June 12, 2026

    दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के तुगलकाबाद एक्सटेंशन में पांच मंजिला इमारत में लगी आग

    June 12, 2026

    सरकार जनहित में सुनिश्चित करें कि उसके निर्देश और अदालतों के फैसले लागू हो सके

    June 12, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.