Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • ‘गुजारा भत्ता वसूली के लिए नहीं होगी पति की गिरफ्तारी’: इलाहाबाद हाईकोर्ट
    • राधा-दामोदर जी मंदिर वृंदावन का विशेष महत्त्व है
    • सरकार आरटीआई के संदर्भ में खरगे की शंका का समाधान करे, सूचना अधिकार अधिकार को कमजोर या खत्म किया जाना सोचना भी नहीं चाहिए
    • होली दिवाली दशहरा ईद पर बसों और ट्रेनों की संख्या बढ़े, हवाई किराये पर हो नजर
    • मुख्यमंत्री जी चाटुकार और भ्रष्ट आंकड़ेबाजी में विश्वास रखने वाले अफसर ? विकास कार्य की प्रगृति की आंकड़ेबाजी की पोल खोलने में सक्षम है केंद्रीय मंत्री और विधायक का विवाद
    • विजय देवरकोंडा दो फिल्मों में दिखेगा अलग-अलग अंदाज
    • दो छात्रों की चोटी काटने को लेकर जमकर हंगामा
    • ठगी करने वाले बड़े साइबर गिरोह का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»सरकार आरटीआई के संदर्भ में खरगे की शंका का समाधान करे, सूचना अधिकार अधिकार को कमजोर या खत्म किया जाना सोचना भी नहीं चाहिए
    देश

    सरकार आरटीआई के संदर्भ में खरगे की शंका का समाधान करे, सूचना अधिकार अधिकार को कमजोर या खत्म किया जाना सोचना भी नहीं चाहिए

    adminBy adminJanuary 31, 2026No Comments4 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    2005 में पूर्व पीएम स्व मनमोहन सिंह द्वारा अपने कार्यकाल में आम आदमी को उसके कार्य और प्रगृति की जानकारी उपलब्ध कराने हेतु सूचना का अधिकार अधिनियम लागू किया गया था। अगर कुछ मामलों को छोड़ दों तो यह नागरिकों के लिए एक अच्छा कानून साबित हुआ। लेकिन कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा २०१४ से अब तक १०० से अधिक आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या की ओर सरकार का ध्यान दिलाते हुए स्पष्ष्ट किया कि दिसंबर २०२५ तक केंद्रीय सूचना आयोग बिना मुख्य सूचना आयुक्त के ही काम कर रहा था। बीते ११ सालों में ऐसा सातवीं बार होने की बात भी खरगे ने कही। बताते चलें कि कांग्रेस ने आर्थिक सर्वेक्षण में सूचना के अधिकार कानून की समीक्षा करने पर केंद्र सरकार को घेरा। पार्टी ने आरोप लगाया है कि सरकार आरटीआई को पहले ही कमजोर कर चुकी है और अब मनरेगा के बाद सूचना का अधिकार कानून की बारी हो सकती है। एक्स पर पोस्ट कर खरगे ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण में आरटीआई कानून की फिर से जांच करने की बात कही जा रही है। उनका कहना है कि सरकार नौकरशाहों के पब्लिस सर्विस रिकॉर्ड को जनता से बचाने की संभावना तलाश कर रही है।
    आम आदमी से जुड़े आरटीआई के बारे में मुझे लगता है कि केंद्र सरकार को इस मामले में खरगे की जिज्ञासा और आम आदमी का हित ध्यान में रखते हुए अपनी ओर से स्पष्ट किया जाना चाहिए। जहां तक इसे कमजोर करने की बात है तो इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि हर क्षेत्र में नौकरशाह इस कानून से परेशान हैं। क्योंकि जब से यह बना है तब से उनकी निरंकुशता लापरवाही पर रोक लगने के प्रयास हुए तथा सरकारी काम में भ्रष्टाचार, समय से मानक के अनुसार निर्माण कार्य व विकास, ठेकेदारों की मिलीभगत से होने से जो कार्रवाई हो रही है उससे बड़ी संख्या में नीचे से ऊपर तक अफसर और सरकार के जनहित के कार्यों को प्रभावित कर रहे ठेकेदार यह चाहते हैं कि आरटीआई कानून खत्म हो या उसे इतना कमजोर कर दिया जाए कि इसका मुख्य उददेश्य ही खत्म हो जाए। मुझे लगता है कि खरगे जी की आशंका गलत भी नहीं है क्योंकि पिछले २० साल में कई बार देखने को मिला कि जनपदों में कई अधिकारी, केंद्र के कई मंत्रालय की जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराते। कभी पत्रावली उपलब्ध नहीं है तो कागजों की संख्या इतनी बढ़ा दी जाती है कि जानकारी मांगने वाला उन्हें पूरा नहीं कर पाता या घूमा फिराकर इतनी जानकारी दी जाती है जिससे सूचना मांगने वाला परेशान होकर खामोश हो जाता है। बीते ११ सालों में १०० आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या की बात उठाई गई जो गंभीर है। सरकार को यह भी बताना चाहिए कि इन हत्याओं में क्या कार्रवाई की जा रही है और अब तक कितनों को सजा दी। क्योंकि यह कानून एकमात्र ऐसा नियम है तो सीधे आम आदमी को लाभान्वित करता है और उसे उसके अधिकारों और संबंधित काम की जानकारी देने के लिए अधिकारियों को मजबूर भी करता है।
    (प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)

    sampadkiya tazza khabar tazza khabar in hindi
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    ‘गुजारा भत्ता वसूली के लिए नहीं होगी पति की गिरफ्तारी’: इलाहाबाद हाईकोर्ट

    January 31, 2026

    राधा-दामोदर जी मंदिर वृंदावन का विशेष महत्त्व है

    January 31, 2026

    होली दिवाली दशहरा ईद पर बसों और ट्रेनों की संख्या बढ़े, हवाई किराये पर हो नजर

    January 31, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.