नैनीताल 30 जनवरी। उत्तराखंड में भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील सरोवर नगरी नैनीताल पर खतरा मंडराता दिख रहा है। वर्ष 2018 और 2025 में शहर की लोअर माल रोड पर उभरी दरारों का अभी समाधान नहीं हो सका हैं, अब तल्लीताल डांठ चौराहे पर दरारें उभर आई हैं। सतह पर नजर आ रही दरारें यदि चौड़ी और गहरी हुईं तो यह शहर के लिए खतरे का संकेत हैं। लोक निर्माण विभाग इन दरारों की पड़ताल करेगा और स्थिति स्पष्ट करेगा।
नैनीताल में साल भर देशी विदेशी पर्यटकों की आवाजाही रहती है। ग्रीष्ककाल में तो हर दिन 15-20 हजार पर्यटक शहर में प्रवेश करते हैं। वाहनों का दबाव बढ़ने पर पुलिस करीब आठ किमी पूर्व बाईपास पर ही वाहनों को रोक देती है और शटल सेवा से पर्यटक शहर में भेजे जाते हैं। इधर, तल्लीताल डांठ चौराहे में सड़क पर कई छोटी-बड़ी दरारें उभर आई हैं। यह दरारें पिछले साल बिछाए गए मेस्टिक (डामर के लेप) की ऊपरी सतह पर है या भीतर तक इसका प्रभाव है, फिलहाल यह साफ नहीं है लेकिन यदि दरारें गहरी हुई, तो यह बड़ा खतरा हो सकता है।
दरअसल बेहद संवेदनशील शहर में मानसून के दौरान चौतरफा होने वाले भूस्खलन पहले से ही चिंता का सबब बने हुए हैं। ऐसे में झील का पानी रोकने के लिए बने ब्रिटिशकालीन डांठ के ऊपर सड़क पर छोटी-बड़ी दरारों ने चिंता बढ़ा दी है। लोनिवि के अधिशासी अभियंता रत्नेश कुमार सक्सेना ने बताया कि पिछले साल अक्टूबर में चौराहों के चौड़ीकरण के बाद मेस्टिक की परत बिछाई गई थी, जिससे जोड़ों को भरा गया था। शीतकाल में मेस्टिक के सिकुड़ने के कारण भी दरारें उभरी हुई प्रतीत होती हैं।

