मंडलायुक्त विमल कुमार दुबे के श्रम सेवायोजन राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ के द्वारा पैर छूने को लेकर चर्चाएं तो शुरू हुई और मीडिया की सुर्खियां बन गई। एक खबर के अनुसार ललितपुर सागर हाईवे स्थित कैलागुवां चौराहे पर बन रहे ओवरब्रिज का निरीक्षण करने आए मंडलायुक्त विमल कुमार दुबे को देखकर राज्यमंत्री ने उन्हें माला पहनानी चाही लेकिन मंडलायुक्त ने वह उन्हें ही पहना दी। इसके बाद राज्यमंत्री ने पैर छूने की कोशिश की जिसे मंडलायुक्त ने रोक दिया। सुगबुगाहट शुरू होने पर राज्यमंत्री ने कहा कि आज संक्रांति का पर्व है और इस दिन ब्राहमणों के पैर छुए जाते हैं इसलिए मैने पैर छुए। इस पर मंत्री ने जो कहा वो भी सही है और मंडलायुक्त ने जो किया वो भी सही है।
स्मरण रहे कि इस तरह के किस्से जैसे किसी अधिकारी ने मंत्री के पैर छुए या नेता ने अफसरों के छूने को मिलते रहते हैं। मेरा मानना है कि किसे सम्मान देना है किसके पैर छूकर आशीर्वाद लेना है यह व्यक्ति का निजी अधिकार है। लोकतंत्र में ऐेसे मामलों की टिप्पणी करना जायज भी नहीं है। क्योंकि कोई भी किसी के पैर वैसे ही नहीं छूता है। मन में सम्मान की भावना है तो नमस्कार करने माला पहनाकर सम्मान करने या पैर छूने में कोई बुराई नहीं है। ऐेसे मुददो को किसी भी रूप में उछाला भी नहीं जाना चाहिए। क्योंकि इससे पहननने और पहनाने वाले की भावना को ठेस पहुंचने की बात से इनकार नहीं किया जा सकता।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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