देहरादून 16 जनवरी। प्रदेश में अब पहचान छिपा कर विवाह करना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा। ऐसा करने वालों के खिलाफ अब समान नागरिक संहिता की धाराओं के तहत कार्रवाई होगी। इस पर अर्थ दंड व कारावास के दंड की व्यवस्था की जा रही है। ये कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत की जाएगी।
समान नागरिक संहिता अधिनियम में अब यह नया प्रविधान किया जा रहा है। एक अन्य संशोधन में अब अपर सचिव स्तर के अधिकारी भी मुख्य रजिस्ट्रार जनरल का पदभार संभाल सकेंगे। कैबिनेट ने समान नागरिक संहिता में इन संशोधनों को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
प्रदेश में अब पहचान छिपा कर विवाह करने वालों की खैर नहीं होगी। ऐसा करने की पुष्टि होने पर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। गृह विभाग ने समान नागरिक संहिता संशोधन अधिनियम में इस प्रविधान को शामिल किया है। इसे जल्द ही अध्यादेश के रूप में लाया जाएगा।
प्रदेश में अभी यह देखा गया है कि कई लोग अपनी पहचान छिपा कर या तो विवाह कर रहे हैं या फिर लिव इन में रह रहे हैं। ऐसे व्यक्ति या तो पहले से ही विवाहित हैं या फिर ये अपनी पुरानी पहचान छिपा कर दूसरे पक्ष को झांसे में लेकर उनके साथ विवाह कर रहे हैं। ऐसे कई मामले प्रकाश में भी आएं हैं और इन पर विभिन्न न्यायालयों में वाद भी चल रहे हैं।
इसे देखते हुए गृह विभाग ने अब समान नागरिक संहिता को और सख्त बनाने के लिए इसमें संशोधन किया है। इसे दंडनीय अपराध बनाते हुए इसमें अर्थ दंड व कारावास की भी व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही समान नागरिक संहिता में कुछ और संशोधन किए गए हैं।
इनके तहत जनवरी, 2025 से पहले हुए विवाह के पंजीकरण की अनिवार्यता की तिथि छह माह से बढ़ाकर एक वर्ष कर दी है। यानी 27 जनवरी से पहले सभी को इसका पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।

