अपने प्यारे देश भारत में एक किंदवंती अनुसार वर्ष 365 दिन में हर दिन कोई न कोई छोटा-बड़ा त्यौहार पूरी धूमधाम और श्रद्धा और आस्था से मनाया जाता है और क्योंकि ज्यादातर त्यौहारों में बनने वाले स्वादिष्ट भोजन बनाने वाले और अन्यों को भी विभिन्न रूपों में खाने के लिए उपलब्ध होते हैं इसलिए सबको हर त्यौहार से कोई ना कोई लगाव किसी न किसी प्रकार का जरूर होता है।
अब अगर हम बात लोहड़ी की करें तो बीती 13 जनवरी को रिश्तों की मिठास और इस मौके पर बनने वाले भोजन की खुशबू संग अपूर्व उत्साह के साथ ढोल-नंगाड़ों की थाप और संगीत की मधुर धुनों के बीच नाचते गाते सभी देशवासियों ने मनाया कुछ ने सार्वजनिक स्थानों पर तो कुछ ने घर के बाहर लोहड़ी जलाकर तो बाकियों ने बंद कमरों में फिल्मी गानों की धुनों या टीवी देखते हुए बिस्तर में बैठ रेवड़ी मूंगफली का सेवन करते हुए मनाया लेकिन सबसे बड़ी बात सर्दी की परवाह किये बिना नई फसल के आगमन की खुशी में धूमधाम से यह लोहड़ी का त्यौहार मना।
पिघली सर्दी और लोहड़ी की आग की तपन में जो नागरिक झूमें वह सभी ने उन्हें पूरे वर्ष याद रहेगा। दोस्तों कल 15 जनवरी को हम मकर संक्रांति मनाने जा रहे हैं हर वर्ष इस अवसर पर खिचड़ी और दान-दक्षिणा दिये जाने की परम्परा सदियों से चली आ रही है मकर संक्रांति आज से ही शुरू हो गयी और मुख्य रूप से 15 जनवरी को मनाई जाएगी। संक्रांति पर्व जहां देने वालों के लिए शुभ और आत्म संतुष्टी तथा धर्म का पालन के रूप में महत्वपूर्ण है तो जिन लोगों को दान-दक्षिणा मिलती है उनमें व्याप्त खुशी और उत्सव का उत्साह देखने लायक होता है। बताते हैं कि इस वर्ष यह पर्व स्वार्थ सिद्धी और अमृत सिद्धी योग में मनाया जाएगा। बताते हैं कि ज्योतिषिय दृष्टि से सूर्य एक राशि में एक माह तक गोचर करते हैं फिर अगली राशि में प्रवेश करते हैं सूर्य 12 राशियों के राशि चक्र को एक वर्ष में पूरा करते हैं। जब एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तो उसे संक्रांति कहा जाता है। एक वर्ष में सूर्य की 12 संक्रांतियां होती हैं लेकिन इनमें मकर संक्रांति सबसे ज्यादा महत्व रखने वाली है क्योंकि सूर्य धनु राषि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते है और इसी दिन मकर संक्रांति पर्व मनाया जाता है बताते हैं कि मकर संक्रांति का उत्तरायण शुरू होने से दिन बड़ा होने लगता है और पूर्व में सर्दी भी कम होने लगती है ऐसा बताया जाता है।
गुरूवार को प्रातरू 7 बजकर 15 मिनट से 8 बजकर 34 मिनट तक दान का शुभ मुहूर्त तथा दोपहर 12.30 बजे से 3.08 मिनट तक लाभा मुहूर्त माना जाता है। वैसे तो धार्मिक विद्वानो ंके अनुसार इससे संबंध अनेकों उपायों और मनाने के तरीके हैं लेकिन कुल मिलाकर अगर देखें तो संक्रांति पर बांटी जाने वाली खिचड़ी पर अपना धार्मिक और वैज्ञानिक महत्वपूर्ण अर्थ हैं कहते हैं कि महंगी डिटाक्स डाइट पर भारी है खिचड़ी की एक कटोरी। स्वास्थ्य सलाहकारों की अगर माने तो आज के दौर में अपनी सेहत सुधारने के लिए महंगे कोम्बुचा प्रोबायोटिक्स और विदेशी डिटॉक्स डाइट के पीछे जब हम भाग रहे है ऐसे में अपने देश का यह साधारण से भोजन खिचड़ी इन सबकों मात दे रहा है जानकारी अनुसार उत्तर भारतीय घरों में मकर संक्रांति पर बनाई जाने वाली खिचड़ी अब परम्परा ही नहीं विज्ञान और सेहत का साझा रिश्ता बन गयी हैं क्योंकि यह एक सम्पूर्ण आहार है विज्ञान के नजरियें से देखें तो चावल और दाल का मेल शरीर को वह सभी 9 जरूरी है अमीनोएसिड प्रदान करता है जिनकी मांसपेशियों और उतकों की मरम्मत के लिए जरूरी होती हैं। इसमें सबसे बड़ी खुशी पाचन में आसान होना पेट को उत्तेजित करने के बजाये उसे शांत करना आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि जब हम खिचड़ी जैसा वन पार्ट मील खाते हैं तो हमारे लीवर का काम लगभग 50 प्रतिशत काम कम हो जाता है।
यह भी पक्का है कि खिचड़ी हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए जादुई भोजन है मनोविज्ञानियों का मानना है कि इंसान जब तनाव या दुख में होता है तो उसका शरीर ऐसी चीजे चाहता है जो उसे सुरक्षा का एहसास करायें और नरम-गरम स्वाद में सौम्य इस खिचड़ी में ऐसे गुण समाये है जो बच्चों से लेकर बड़ो तक सबको प्रिय तो हैं ही स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है। जानकारों का मानना है कि अगर सफेद की बजाये दलिया, बाजरा, रागी या ब्राउन चावल व फाइव चावल का उपयोग किया जाए और भरपूर सब्जियों डालकर इसे पोशक तत्व बनाया जा सकता है कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि घर में खाई जाने वाली मकर संक्रांति की एक कटोरी खिचड़ी अनमोल भोजन का खजाना है हमारे स्वास्थ्य के लिए।
प्रस्तुति:- अंकित बिश्नोई
मजीठियां बोर्ड यूपी के पूर्व सदस्य सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए के राष्ट्रीय महामंत्री, संपादक पत्रकार
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