दरभंगा 12 जनवरी। दरभंगा के महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी और आखिरी महारानी कामासुंदरी देवी का सोमवार की सुबह निधन हो गया। ‘महारानी’ पिछले छह महीनों से बीमार थीं। महारानी कामासुंदरी देवी ने दरभंगा में महाराजा के कल्याणी आवास पर आखिरी सांस ली। उनकी मौत पर शाही परिवार के सदस्यों सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने शोक व्यक्त किया है।
महाराजा कामेश्वर सिंह ने 1940 में कामासुंदरी देवी से शादी की थी। उन्होंने पहले महारानी राजलक्ष्मी और महारानी कामेश्वरी प्रिया से शादी की थी। महारानी कामासुंदरी देवी का जन्म 1930 में हुआ था। महाराजा कामेश्वर सिंह दरभंगा के आखिरी शासक थे और 1962 में उनका निधन हो गया। उनकी पहली पत्नी, महारानी राजलक्ष्मी का निधन 1976 में हुआ, जबकि उनकी दूसरी पत्नी, महारानी कामेश्वरी प्रिया का निधन 1940 में हुआ। महाराजा कामेश्वर सिंह को 3 शादियों के बाद भी कोई संतान नहीं थी। उनकी तीसरी पत्नी कामसुंदरी देवी ने अपनी बड़ी बेटी के बेटे कुमार कपिलेश्वर को दरभंगा राज का ट्रस्टी बनाया था।
दरभंगा राज के उत्तराधिकारी कुमार कपिलेश्वर बताते हैं, दरभंगा राज दान को लेकर कभी पीछे नहीं हटा। जब गांधी जी दक्षिण अफ्रीका से लौटे तो उनके सामने मूवमेंट में काफी संकट आ गया था।
काफी परेशान होकर गांधी जी ने दरभंगा राज के महाराजा लक्ष्मेश्वर सिंह को पत्र लिखकर मदद मांगी थी। गांधी जी को आर्थिक संकट के साथ पब्लिसिटी को लेकर समस्या थी।
पत्र मिलते ही महाराजा लक्ष्मेश्वर सिंह ने सारा मीडिया का प्रभार संभाल लिया और गांधी जी को आर्थिक संकट से बाहर निकाला। दरभंगा राज गांधी जी का पहला मददगार रहा है। गांधी जी के हाथों लिखा पत्र आज भी मौजूद है।
महाराजा की मृत्यु के बाद, महारानी कामासुंदरी देवी ने उनकी याद में कल्याणी फाउंडेशन की स्थापना की। इस फाउंडेशन के माध्यम से, उन्होंने महाराजा के नाम पर एक लाइब्रेरी स्थापित की, जिसमें आज भी 15,000 से अधिक किताबें हैं। महारानी कल्याणी फाउंडेशन के माध्यम से साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रबंधन करती रहीं। महारानी की मृत्यु को दरभंगा शाही परिवार के लिए एक युग का अंत माना जा रहा है।

