लखनऊ 12 जनवरी। उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बार फिर जीएसटी चोरी के एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है. इस सिंडिकेट ने सरकार को करीब 100 करोड़ रुपये की चपत लगाई है. इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें केंद्रीय जीएसटी विभाग के एक तैनात इंस्पेक्टर मोहित अग्रवाल का भी नाम सामने आया है, जिसे अब आरोपी बनाया गया है.
जांचकर्ताओं के अनुसार, यह गिरोह फर्जी कंपनियां (शेल कंपनियां) बनाने, जाली चालान (फेक इनवॉइस) जारी करने और फर्जी ई-वे बिल तैयार करने के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का गलत दावा कर रहा था. इन फर्जी लेन-देन से सरकार के खजाने को करीब 100 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. गाजियाबाद के कवि नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज इस मामले की जांच STF ने संभाली.
STF ने हरदीप सिंह उर्फ प्रिंस (नई दिल्ली स्थित स्क्रैप कारोबारी), जितेंद्र झा, पुनीत अग्रवाल और शिवम सिंह को गिरफ्तार किया है. ये सभी दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र से जुड़े हुए हैं. जांच में पता चला कि गिरोह ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा सहित कई राज्यों में दर्जनों फर्जी फर्में रजिस्टर कराई थीं.
एसटीएफ के मुताबिक आरोपी पुनीत अग्रवाल की एक फर्म एडॉन ऑटोमोबाइल है। ये फर्म भी बोगस थी। करोड़ों का हेरफेर इसके जरिये किया गया था। तीन महीने पहले इस फर्म को सस्पेंड कर दिया गया था। तब पुनीत ने इंस्पेक्टर मोहित अग्रवाल के जरिये इस फर्म को रिस्टोर करवा लिया था। उस पर फिर से लेनदेन शुरू कर दिया था। इंस्पेक्टर को इसके एवज में 40 हजार रुपये दिए थे।
इंस्पेक्टर ने लाखों वसूले, चैट में मिले सबूत
इंस्पेक्टर मोहित अग्रवाल ने गिरोह की विभागीय तौर पर मदद की जिससे आरोपी हेरफेर करते रहें। इसके बदले में उसने लाखों रुपये वसूले। अंदेशा है कि इस तरह सैकड़ों फर्मों में उसने खेल किया। एसटीएफ ने पुनीत के मोबाइल से इस संबंध में अहम व्हाट्सएप चैट जुटाया है। इसमें पुनीत और इंस्पेक्टर लेनदेन से लेकर हेरफेर करने की बातचीत कर रहे थे।
सीओ एसटीएफ प्रमेश शुक्ला ने बताया कि इंस्पेक्टर की भूमिका सामने आई है। गिरोह में वह भी शामिल है। इसलिए उसको भी आरोपी बनाया गया है। गिरफ्तारी के लिए टीम लगाई गई है।
जांच में एक हरियाणा निवासी दलाल आलोक का नाम भी सामने आया है, जिसने कथित तौर पर हरदीप सिंह को एकमुश्त कमीशन पर फर्जी फर्में उपलब्ध कराईं. पुनीत अग्रवाल के फोन से बरामद व्हाट्सएप चैट्स में भुगतान, कमीशन और रिकॉर्ड में हेरफेर से जुड़ी बातचीत मिली है, जो इस पूरे नेटवर्क की गहराई को दर्शाती है.
STF अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जांच का दायरा अब यूपी के अलावा पड़ोसी राज्यों तक बढ़ाया जा रहा है. आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की प्रबल संभावना है.

