लखनऊ 09 जनवरी। छात्रों को मोबाइल से दूर करने, उनमें पढ़ने के प्रति दिलचस्पी जगाने एवं तर्क शक्ति बढ़ाने के प्रयासों को लेकर शासन ने बड़ा कदम उठाते हुए स्कूलों एवं कालेजों में समाचार पत्र का नियमित पाठन अनिवार्य किया है।
इससे पहले 23 दिसंबर को बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने इस संबंध में आदेश जारी किया था। इसे आगे बढ़ाते हुए अब श्रम एवं सेवायोजन विभाग के प्रमुख सचिव ने अटल आवासीय विद्यालयों के लिए समाचार पत्र पढ़ना अनिवार्य कर दिया है।
हर मंडल में संचालित अटल आवासीय विद्यालयों में नियमित रूप से हिंदी और अंग्रेजी समाचार पत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। छात्रों को प्रतिदिन समाचार पढ़ने, नए शब्द सीखने और महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। विद्यार्थियों की भाषा क्षमता, सामान्य ज्ञान और सोचने-समझने की शक्ति बेहतर होगी।
उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष व प्रमुख सचिव श्रम व सेवायोजन डा. एमके शन्मुगा सुंदरम ने आठ जनवरी को जारी आदेश में कहा है कि सभी विद्यालयों के पुस्तकालय में हिंदी और अंग्रेजी भाषा के समाचार पत्र उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। समाचार पत्रों में सामान्य ज्ञान के अतिरिक्त विज्ञान, अर्थव्यवस्था, नवीन विकास एवं खेल से संबंधित विषयों के संबंध में पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
जूनियर स्तर के छात्रों के लिए विज्ञान, पर्यावरण एवं खेल जैसे विषयों पर स्क्रैपबुक तैयार करने के लिए कहा गया है। छात्रों के मानसिक विकास के लिए समाचार पत्रों में प्रकाशित सुडोकू, शब्द पहेली व क्विज प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। विद्यार्थियों के संपादन में स्कूल की पत्रिका निकालने का भी निर्देश दिया गया है। अटल आवासीय विद्यालयों में सीबीएसई माध्यम से पढ़ाई होती है।
प्रमुख सचिव ने बताया कि कक्षा प्रारंभ होने से पहले का दस मिनट का समय समाचार पत्र के लिए रिजर्व किया जाएगा। विद्यालय के डिस्प्ले बोर्ड पर आज का विचार लिखना होगा। कक्षा 11 और 12 के छात्रों के लिए सप्ताह में एक बार संपादकीय लेख पर आधारित समाचार लेखन या ग्रुप डिस्कशन आयोजित करना होगा।
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