प्रयागराज 07 जनवरी। प्रयागराज में 3 नहीं, 4 हत्याएं होने वाली थीं। पिता, बहन और भांजी को मारने के बाद बेटा मुकेश अपने भाई को भी मार देना चाहता था। गांव में भाई मुकुंद जब उसको दिखा, तो पहले मुकेश ने उसको चैलेंज किया, फिर गोली चला दी।
कंधे को छूती हुई गोली निकल गई। खून से लथपथ मुकुंद अपनी जान बचाने के लिए पैदल ही दौड़ पड़ा, बाइक तक उठाने का समय नहीं मिला। करीब 3Km तक पैदल ही बचते हुए भागता रहा। पीछा कर रहे मुकेश ने तमंचे पर दूसरी गोली लोड कर ली थी, मगर दूरी ज्यादा होने से फायर नहीं किया।
मुकुंद ने पुलिस को बताया कि भागते-भागते मैं बगल के गांव में पहुंच गया, वहां बाउंड्रीवॉल के पीछे पुआल के ढेर में छिपकर खुद को बचा सका, नहीं तो मैं भी मारा जाता।
पुलिस कस्टडी में मुकेश ने पूछताछ के दौरान नए खुलासे किए हैं। उसने इस नरसंहार की प्लानिंग 4 दिन पहले ही कर ली थी। 4.5 बीघा खेती और गांव के बड़े मकान पर कब्जे के लिए मुकेश 3 लोगों को रास्ते से हटाना चाहता था।
मुकेश कुमार ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि उसके पास यहां कोई काम नहीं था। वह दस बिस्वा जमीन इसलिए मांग रहा था कि उसे बेचकर कोई काम करेगा, लेकिन उसे जमीन नहीं दी जा रही थी। दो जनवरी की रात लगभग नौ बजे वह पिता के पास पहुंचा और बोला कि उसे आधी नहीं सिर्फ दस बिस्वा जमीन चाहिए, लेकिन उसकी एक नहीं सुनी।
बार-बार कहते-कहते वह थक चुका था। पिता व भाई कोई नहीं सुन रहा था। उसके पिता ने कमरे से उसे भगाते हुए बोला कि कुछ नहीं मिलेगा। इसके बाद ही उसने पूरी घटना को अंजाम दिया। देर रात शवों को ठिकाने लगाने से पहले वह अकेले घर से निकलकर कुएं तक गया। कोहरा इतना घना था कि पांच फीट तक कुछ नजर नहीं आ रहा था। इसी का उसने लाभ उठाया और तीनों शवों को कुएं में ले जाकर फेंक दिया। किसी की नजर शवों पर न पड़े, इसके लिए ऊपर से पुआल भर दिया था।
राम सिंह पटेल, साधना और आस्था का शव जिस कुएं में फेंका गया था, वह गांव से बाहर बाग में है। यहीं बगल में राम सिंह का खेत भी है। पांच फीट चाैड़ा और 15 फीट से अधिक गहरा यह कुआं वर्षों से सूखा पड़ा है। मुकेश को शवों को ठिकाने लगाने के लिए इसी कुएं को चुना। सबसे पहले उसने बहन, फिर पिता और आखिर में भांजी के शव को फेंका। किसी की नजर न पड़े, इसके लिए घर से पुआल का पांच ढेर उठाया और उसे खोलकर पूरे कुएं में फेंक दिया। जिससे कुआं पुआल से पट गया।
मुकेश बड़े नाटकीय ढंग से पुलिस के हत्थे चढ़ा। रविवार शाम मऊआइमा पुलिस जब उसकी पत्नी को थाने ले आई तो इसकी जानकारी उसे हो गई। देर शाम वह कचहरी आ गया। रातभर कचहरी के आसपास घूमता रहा। सोमवार दोपहर करीब 12 बजे वह आत्मसमर्पण करना चाहता था, लेकिन इसी बीच किसी ने मुकेश को पहचान लिया और एसओजी को इसकी जानकारी दे दी। एसओजी टीम पहुंची और उसे पकड़ लिया।

