Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • बिल्डर के घर से नौकरों ने उड़ा डाले 18 करोड़ के गहने और नकदी
    • एक फीट ताजा बर्फबारी पर्यटन स्थल सोलंगनाला में
    • हर महीने लाखों लोग खरीदते हैं भारत में ये 5 मोटरसाइकल को
    • सबसे कम काम और सबसे ज्यादा तनख्वाह लेते हैं! सरकार बैंकों की हड़ताल पर लगाए रोक या उन्हें घर बैठे तनख्वाह दे लेकिन ग्राहकों का हित प्रभावित ना हो
    • यूजीसी के नियमों और शंकराचार्य के अपमान के विरोध पर सरकार करे गंभीर मनन, सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे के बाद इस विषय को लेकर आए उबाल का निकाला जाए सर्वसम्मत समाधान
    • बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘एनिमल पार्क’ के अगले भाग पर काम चल रहा है : रणबीर कपूर
    • इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सएप पर एआई के लिए देना होगा शुल्क
    • मदरसे के बच्चों ने लगाये प्रभात फेरी में धार्मिक नारे
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»पीएम मोदी को अजमेर शरीफ दरगाह पर चादर चढ़ाने से रोकने की अर्जी खारिज
    देश

    पीएम मोदी को अजमेर शरीफ दरगाह पर चादर चढ़ाने से रोकने की अर्जी खारिज

    adminBy adminJanuary 6, 2026No Comments5 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    नई दिल्ली 06 जनवरी। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अजमेर शरीफ दरगाह पर औपचारिक ‘चादर’ चढ़ाने से रोकने के निर्देश देने वाली याचिका खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा की यह मुद्दा न्याय योग्य नहीं है।

    चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियों द्वारा इस्लामिक विद्वान ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती और अजमेर दरगाह को राज्य प्रायोजित औपचारिक सम्मान और प्रतीकात्मक मान्यता देने को भी चुनौती दी गई थी।

    याचिकाकर्ता जितेंद्र सिंह और अन्य की ओर से पेश हुए वकील वरुण सिन्हा ने कहा कि मोइनुद्दीन चिश्ती की अजमेर दरगाह पर प्रधानमंत्री द्वारा ‘चादर’ चढ़ाने की प्रथा (जिसे जवाहरलाल नेहरू ने 1947 में शुरू किया था) बिना किसी कानूनी या संवैधानिक आधार के तब से जारी है।

    CJI कांत ने सिन्हा से कहा, ‘अदालत कोई टिप्पणी नहीं करेगी क्योंकि यह मुद्दा न्याय योग्य नहीं है।’ सिन्हा ने कहा कि ट्रायल कोर्ट में एक सिविल सूट लंबित है, जिसमें दावा किया गया है कि दरगाह एक शिव मंदिर के खंडहरों पर बनाई गई थी।

    सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि रिट याचिका खारिज होने का लंबित सिविल सूट पर कोई असर नहीं पड़ेगा। CJI कांत ने कहा, ‘आप जाएं और सिविल सूट में उचित राहत मांगें।’ याचिकाकर्ता जितेंद्र सिंह और ने कहा कि वे केंद्र सरकार की विभिन्न एजेंसियों द्वारा ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को दिए जा रहे राज्य प्रायोजित औपचारिक सम्मान, आधिकारिक संरक्षण और प्रतीकात्मक मान्यता की निरंतर प्रथा से दुखी हैं।

    उनकी याचिका में कहा गया है, ‘ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि मोइनुद्दीन चिश्ती विदेशी आक्रमणों से जुड़े थे, जिन्होंने दिल्ली और अजमेर पर विजय प्राप्त की और मूल आबादी का बड़े पैमाने पर दमन और धर्मांतरण किया, ये कार्य भारत की संप्रभुता, गरिमा और सभ्यतागत लोकाचार के मौलिक रूप से विपरीत हैं।

    हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने सुप्रीम कोर्ट का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि यह फैसला न सिर्फ संविधान की भावना को मजबूत करता है, बल्कि भारत की गंगा-जमुनी तहजीब, भाईचारे और आपसी सौहार्द की परंपरा को भी और सशक्त करता है।

    ajmer-sharif-chadar PM Modi supreme-court tazza khabar tazza khabar in hindi
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    बिल्डर के घर से नौकरों ने उड़ा डाले 18 करोड़ के गहने और नकदी

    January 28, 2026

    एक फीट ताजा बर्फबारी पर्यटन स्थल सोलंगनाला में

    January 28, 2026

    हर महीने लाखों लोग खरीदते हैं भारत में ये 5 मोटरसाइकल को

    January 28, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.