मंदसौर 29 नवंबर। जिले के ज्वाइंट कलेक्टर राहुल चौहान के खिलाफ दहेज प्रताड़ना की FIR इंदौर में दर्ज की गई है। उनकी पत्नी निर्मला चौहान ने आरोप लगाया है कि शादी के बाद से ही उन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया और कम दहेज मिलने पर मारपीट की गई। निर्मला ने यह भी आरोप लगाया है कि पति ने योजनाबद्ध तरीके से अबॉर्शन भी कराया। अधिकारी होने के दबाव के कारण पहले रिपोर्ट दर्ज नहीं हो पा रही थी, लेकिन अब महिला थाना पुलिस ने सामान्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया है।
निर्मला चौहान (32) की रिपोर्ट पर महिला थाना पुलिस ने 27 नवंबर को राहुल चौहान के खिलाफ दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961-1, 4, भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 115(2), 296 (b) और 85 के तहत केस दर्ज किया था। इस मामले की जानकारी 28 नवंबर को सामने आई। निर्मला और राहुल चौहान की शादी 16 दिसंबर 2018 को हुई थी। उस समय राहुल चौहान ट्रेनी डिप्टी कलेक्टर थे। शादी के अगले दिन से ही पति ने मारपीट शुरू कर दी थी।
मामले की जानकारी देते हुए कलेक्टर की पत्नी निर्मला चौहान ने बताया कि ‘मेरी शादी 16 दिसंबर 2018 को हुई थी। तब राहुल चौहान ट्रेनी डिप्टी कलेक्टर थे। परिवारवालों की मर्जी से शादी हुई थी। मेरी मां ने अपनी हैसियत अनुसार गृहस्थी का सारा सामान दिया था। शादी के अगले दिन से ही मेरे पति मुझे कम दहेज मिलने की बात पर प्रताड़ित कर गालियां देते हुए मारपीट करने लगे।’
कुछ दिन बाद निर्मला की मां ने ससुर को जमीन रजिस्ट्री के लिए 50 हजार रुपए दिए थे। इसके बाद निर्मला अपने पति के साथ खरगोन में रहने लगी। जून 2019 में राहुल चौहान निर्मला को यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली ले गए। वहां भी राहुल ने निर्मला के साथ मारपीट की। 31 जुलाई 2019 को राहुल निर्मला को उनकी मां के घर छोड़कर चले गए और तलाक देने की धमकी दी। इसके बाद कुछ माह तक वह निर्मला को लेने नहीं आए। राहुल चौहान वर्तमान में मंदसौर के ज्वाइंट कलेक्टर पद पर पदस्थ हैं।
पीड़िता ने पति पर दहेज की मांग, मारपीट, मानसिक उत्पीड़न और दूसरी महिला से संबंध रखने के गंभीर आरोप लगाए हैं। सितंबर 2019 में जब राहुल चौहान इंदौर आए थे, तब निर्मला उनके साथ खरगोन उनके घर रहने चली गई थी। 21 सितंबर 2019 को पति ने यह कहते हुए निर्मला का मोबाइल तोड़ दिया कि उसकी मां ने दहेज में लाखों रुपए नहीं दिए हैं। जब निर्मला ने असमर्थता जताई, तो पति ने उसके साथ मारपीट की, जिससे उसके हाथ में चोट आई और उसे घर से निकाल दिया गया।
इसके बाद निर्मला ने खरगोन थाने में शिकायत दर्ज कराई और मां के साथ इंदौर लौट आई। खरगोन में दो-तीन बार परामर्श केंद्र में समझौते का प्रयास किया गया, लेकिन पति ने निर्मला को रखने से इनकार कर दिया। 2020 में गर्भावस्था के दौरान भी पति ने निर्मला को प्रताड़ित किया, जिसके कारण उसका मिसकेरेज हो गया। उसका इलाज बॉम्बे अस्पताल, इंदौर में चला। इसके बाद वह मां के साथ मायके में रहने लगी। कुछ समय बाद जब वह पति के पास धार गई, तो उसे पता चला कि उसका पति किसी अन्य महिला के साथ रह रहा है।
सरदारपुर में सरकारी आवास में रहने के दौरान पति लगातार तलाक के लिए दबाव बनाता रहा। 17 जुलाई 2022 को पारिवारिक बैठक भी हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला और पति घर छोड़कर चला गया। कुछ दिन वह वहां अकेली रही, फिर अपनी मां के पास इंदौर आ गई। तब से वह मायके में रह रही है।
मामले में राहुल चौहान ने सारे आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि मेरा साढ़े तीन साल से तलाक का केस चल रहा है, यह मैंने खुद ने ही लगाया है। अबॉर्शन करवाने की बात झूठी है, आप बॉम्बे हॉस्पिटल के सारे दस्तावेज प्राप्त कर सत्यता पता कर सकते हैं। यहां इलाज का 15 लाख रु. का खर्च मैंने खुद ने उठाया हैं।

