नई दिल्ली, 25 जून (ता)। भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी को ब्रिटेन में एक और कानूनी झटका लगा है। लंदन की कोर्ट ने उसे दुबई स्थित उनकी कंपनी से जुड़े कर्ज वसूली विवाद में बैंक ऑफ इंडिया को 10.7 मिलियन अमरीकी डॉलर (100 करोड़ रुपए से अधिक) का भुगतान करने का आदेश दिया है। एक फैसले में लंदन सर्किट कॉमर्शियल कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि 13,000 करोड़ रुपए के पीएनबी घोटाले का मुख्य आरोपी नीरव मोदी, फायरस्टार ग्रुप की दुबई स्थित यूनिट फायरस्टार डायमंड एफजेडई को दिए गए लोन के भुगतान के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी है।
भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को यूनाइटेड किंगडम में एक बड़ा कानूनी झटका लगा है। लंदन हाई कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा है कि मोदी को अपने बिजनेस एम्पायर से जुड़े लंबे समय से चल रहे लोन विवाद में 10.7 मिलियन डॉलर से अधिक (100 करोड़ रुपये से ज्यादा) की रकम चुकानी होगी। यह सरकारी बैंक के लिए एक बड़ी जीत है, क्योंकि वह भारत के सबसे हाई-प्रोफाइल आर्थिक अपराधियों में से एक से बकाया रकम वसूलने की कोशिश कर रहा है।
नीरव मोदी का बैंक ऑफ इंडिया के साथ ये विवाद दुबई की कंपनी श्फायरस्टार डायमंड एफजेडईश् को दिए गए लोन से जुड़ा है, जो नीरव मोदी से जुड़ी कंपनी है। बैंक का तर्क था कि मोदी ने लोन के लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी और इसलिए बकाया रकम चुकाने के लिए वही जिम्मेदार थे। वहीं नीरव मोदी ने यूके की अदालतों में इस दावे का विरोध किया। साथ ही वह इस साल की शुरुआत में केस लड़ने के लिए लंदन कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से भी पेश हुआ। आखिरकार हाई कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया का फेवर लिया और माना कि बैंक का दावा सही है। इस फैसले का मतलब है कि बैंक अब यूके में उपलब्ध कानूनी तरीकों से पैसे की वसूली कर सकता है।
यह फैसला ब्रिटेन में नीरव मोदी की परेशानी बढ़ाने वाला है। इस साल मार्च में, लंदन हाई कोर्ट ने भारत में उसके प्रत्यर्पण के खिलाफ कार्यवाही को फिर से शुरू करने की उसकी कोशिश को खारिज कर दिया था। कोर्ट के इस फैसले ने उन पुराने फैसलों पर मुहर लगाई, जिनसे भारत में आरोपों का सामना करने के लिए उसकी वापसी का रास्ता साफ हुआ था। मार्च 2019 में लंदन में गिरफ्तारी के बाद से मोदी यूके में हिरासत में हैं। इन सालों में ब्रिटिश अदालतों ने उसकी कई जमानत अर्जियां खारिज की हैं।
नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक के उस अरबों डॉलर के धोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोपियों में से एक हैं, जिसने 2018 में भारत के बैंकिंग सेक्टर को हिलाकर रख दिया था। भारत की जांच एजेंसियों, जिनमें सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ( सीबीआई) और एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) शामिल हैं, ने उस पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया है। अधिकारियों का आरोप है कि इस धोखाधड़ी में हजारों करोड़ रुपये शामिल थे और इसमें पंजाब नेशनल बैंक द्वारा जारी की गई बैंकिंग गारंटी का गलत इस्तेमाल किया गया था।
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