Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Trending
    • नागरिकों को परेशानी से बचाने के लिए सरकार रैली में जाने के लिए अलग से चलाना शुरू करें ट्रेन
    • पुलिस की वर्दी में ठगी करने वाला ठग निकला होमगार्ड, आरोपी साथी गिरफ्तार
    • अगर सम्मान पाना है तो शिष्य का संबोधन छोड़ भतीजा या पुत्रवत जैसे शब्दों को संबोधन में शामिल कीजिए, क्योंकि एकलव्य जैसे शिष्य तो गुरू द्रोणाचार्य जैसे गुरू भी अब नजर नहीं आते है
    • UP के 75 जिलों में एक साथ बजेगा Black Out सायरन, बंद करनी होंगी घर-दफ्तर की सारी लाइटें
    • भाजपा दूसरे दलों का डाटा चोरी करा रही: अखिलेश
    • बहन की शादी, किस्तें भरने को 15 लाख में चावल बेचा, दो भाई गिरफ्तार
    • 1000 करोड की हेराफेरी में मदद करने के आरोप में पंजाब एंड सिंध बैंक के शाखा प्रबंधक समेत 18 पर केस दर्ज
    • एसडीएम के सरकारी आवास पर कोई बांध गया जर्मन शेफर्ड नस्ल का कुत्ता, मालिक की तलाश शुरू
    Facebook Instagram X (Twitter) YouTube
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Demo
    • न्यूज़
    • लेटेस्ट
    • देश
    • मौसम
    • स्पोर्ट्स
    • सेहत
    • टेक्नोलॉजी
    • एंटरटेनमेंट
    • ऑटो
    • चुनाव
    tazzakhabar.comtazzakhabar.com
    Home»देश»अमेरिका में भारतीय ने बिना अपराध 43 साल जेल में काटी सजा, अब निर्वासन की लटक रही तलवार !
    देश

    अमेरिका में भारतीय ने बिना अपराध 43 साल जेल में काटी सजा, अब निर्वासन की लटक रही तलवार !

    adminBy adminOctober 30, 2025No Comments6 Views
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn WhatsApp Reddit Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    नई दिल्ली 30 अक्टूबर। अपने मित्र की 1980 में हुई हत्या के आरोप से बरी होने का इंतजार करते हुए 43 वर्ष जेल में बिताने के बाद, भारतीय मूल के सुब्रमण्यम वेदम को इस महीने पेंसिल्वेनिया की जेल से रिहा होना था। लेकिन उन्हें संघीय अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया, क्योंकि उनके खिलाफ 1999 का एक पुराना निर्वासन आदेश अब भी प्रभावी है। पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के प्राध्यापकों के पुत्र वेदम और थॉमस किंसेर की उम्र 1980 में करीब 18 वर्ष थी। किंसेर की हत्या के मामले में प्रत्यक्षदर्शी या कोई ठोस कारण न होने के बावजूद वेदम को दो बार दोषी ठहराया गया था।

    अगस्त में एक न्यायाधीश ने वेदम की सजा रद्द कर दी जब उनके वकीलों को नए साक्ष्य मिले, जिन्हें अभियोजन पक्ष ने पहले कभी उजागर नहीं किया था। तीन अक्तूबर को उनकी बहन उन्हें घर ले जाने की तैयारी कर रही थीं, तभी 64 वर्षीय वेदम को आव्रजन अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया। अब उन्हें निर्वासन के खिलाफ एक नई कानूनी लड़ाई लड़नी होगी। वेदम नौ महीने की उम्र में भारत से अमेरिका आए थे। निर्वासन पर ट्रंप प्रशासन के कड़े रुख के बीच, वेदम के वकीलों को यह साबित करना होगा कि 1980 के दशक में मादक पदार्थ के मामले में उनकी दोषसिद्धि के बजाया उनकी गलत सजा के 43 वर्ष को तवज्जो दी जानी चाहिए। अपने जीवन में सुधार करने वाले लोगों को आव्रजन कानून में ऐसे मामलों के लिए राहत की गुंजाइश थी, लेकिन हत्या का दोषी ठहराए जाने के कारण वेदम ने तब यह विकल्प नहीं अपनाया।

    वेदम ने जेल में रहते हुए कई डिग्रियां हासिल कीं, सैकड़ों कैदियों को पढ़ाया और लगभग आधी सदी में केवल एक बार अनुशासन भंग किया, जब उन्होंने बाहर से चावल मंगवाया था। उनके वकील अब उम्मीद कर रहे हैं कि आव्रजन अदालत उनके पूरे जीवन को ध्यान में रखकर निर्णय देगी। वहीं, अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) ने अपने जवाब में कहा है कि “अपराधी अवैध प्रवासियों का अमेरिका में स्वागत नहीं है।” वेदम परिवार 1956 में “हैप्पी वैली” इलाके में बसने वाले पहले भारतीय परिवारों में से एक था।

    वेदम का जन्म 1961 में भारत में हुआ, लेकिन वह अपने पहले जन्मदिन से पहले ही अमेरिका आ गए। उनके पिता विश्वविद्यालय में पोस्टडॉक्टरल फेलो थे और मां स्थानीय पुस्तकालय में काम करती थीं। पुलिस ने जांच के दौरान वेदम को नशीले पदार्थों के आरोप में हिरासत में लिया और बाद में हत्या का आरोप लगाया। 1983 में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। वर्षों बाद, उनके वकीलों को एफबीआई की रिपोर्ट से पता चला कि किंसेर को लगी गोली का आकार उस पिस्तौल से मेल नहीं खाता जिससे वेदम पर गोली चलाने का आरोप था। इसी आधार पर अदालत ने 2024 में उन्हें बरी कर दिया।

    deportation case Subramanyam Vedam tazza khabar tazza khabar in hindi USA world news
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
    admin

    Related Posts

    नागरिकों को परेशानी से बचाने के लिए सरकार रैली में जाने के लिए अलग से चलाना शुरू करें ट्रेन

    January 17, 2026

    पुलिस की वर्दी में ठगी करने वाला ठग निकला होमगार्ड, आरोपी साथी गिरफ्तार

    January 17, 2026

    अगर सम्मान पाना है तो शिष्य का संबोधन छोड़ भतीजा या पुत्रवत जैसे शब्दों को संबोधन में शामिल कीजिए, क्योंकि एकलव्य जैसे शिष्य तो गुरू द्रोणाचार्य जैसे गुरू भी अब नजर नहीं आते है

    January 17, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    © 2026 Tazza khabar. All Rights Reserved.
    • Our Staff
    • Advertise

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.