नई दिल्ली, 05 जुलाई (ता)। यूपीआई के जरिए बढ़ती ऑनलाइन ठगी को रोकने के लिए आरबीआई और बैंक नया सुरक्षा उपाय लाने की तैयारी में हैं। इसके तहत संदिग्ध या अधिक जोखिम वाले लेनदेन में भुगतान से पहले ग्राहक की पुष्टि हां या ना में मांगी जाएगी।
प्रस्ताव के अनुसार, यदि ग्राहक ‘हां चुनता है तो पैसे तुरंत ट्रांसफर हो जाएंगे। ‘नहीं’ चुनने पर लेनदेन रद्द हो जाएगा। यदि ग्राहक कोई जवाब नहीं देता, तो राशि लाभार्थी के खाते में एक घंटे बाद पहुंचेगी। यह प्रस्ताव केवल व्यक्ति से व्यक्ति (पी2पी) भुगतान पर लागू होगा।
दुकानदारों को किए जाने वाले मर्चेंट भुगतान इससे बाहर रहेंगे। आरबीआई ने हाल ही में ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए एक चर्चा पत्र जारी किया था और बैंकों से सुझाव मांगे थे। इसमें एक विकल्प यह भी था कि संदिग्ध मामलों में लाभार्थी के खाते में पैसा तुरंत भेजने की बजाय कुछ समय की देरी से भेजा जाए। बैंकों का कहना है कि यह अतिरिक्त सुरक्षा सभी भुगतान पर लागू नहीं होनी चाहिए। उनका सुझाव है कि यह सुविधा केवल उन लेनदेन में दिखाई जाए, जहां धोखाधड़ी की आशंका ज्यादा हो। जैसे कि अगर रात 2 बजे अचानक कोई बड़ा लेनदेन किया जा रहा हो, पहली बार किसी नए व्यक्ति को पैसे भेजे जा रहे हों या जिस खाते में पैसा भेजा जा रहा है, वह हाल ही में खोला गया हो। ऐसे मामलों में ग्राहक से दोबारा पुष्टि मांगी जा सकती है।
बैंकिंग क्षेत्र का मानना है कि यदि हर बड़े भुगतान पर एक घंटे की देरी लागू कर दी गई, तो डिजिटल भुगतान की रफ्तार प्रभावित हो सकती है और लोग नकद लेनदेन की ओर लौट सकते हैं। आंकड़ों के अनुसार, देश में 2021 में 2.6 लाख डिजिटल धोखाधड़ी के मामले सामने आए थे, जो 2025 में बढ़कर 28 लाख हो गए।
आरबीआई की चर्चा में फिलहाल 10,000 रुपये से ऊपर के लेनदेन पर अतिरिक्त सुरक्षा की बात कही गई है। हालांकि, कई बैंकों का मानना है कि भविष्य में इस सीमा को बढ़ाकर 20,000 रुपये या 25,000 रुपये किया जाना चाहिए, ताकि आम ग्राहकों को अनावश्यक परेशानी न हो।
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