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    Home»देश»168 साल पहले प्रचलन में आयी थी उंगलियों की छाप अब अनिवार्य हो गयी है
    देश

    168 साल पहले प्रचलन में आयी थी उंगलियों की छाप अब अनिवार्य हो गयी है

    adminBy adminJuly 28, 2026No Comments0 Views
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    28 जुलाई 1858 को उंगलियों की छाप को एक नई पहचान देने वाले ब्रिटिश अधिकारी विलियम हर्सल ने यह सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन उनका यह प्रयास सर्वमान्य हो जाएगा। बताते हैं कि उस समय धोखाधड़ी और अपराधों को रोकने के लिए उंगलियों की छाप को मान्यता दी गयी थी जो आज 168 साल बाद हर दस्तावेज के लिए लगभग अनिवार्य बन गयी है खबर के अनुसार यही तरीका
    इसका मुख्य उद्देश्य पेंशन पाने वालों के बीच होने वाली धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े को रोकना था।

    1. भारत के अधिकांश अनपढ़ लोगों को यह तरीका काफी पसंद आया और सहज लगा था।
    2. लोग सादे दस्तखत की तुलना में अंगुलियों की छाप या पामप्रिंट को कई ज्यादा अहमियत देते थे।
    3. शुरुआती विरोध के बावजूद इस कदम ने फिंगरप्रिंटिंग के भविष्य की मजबूत आधारशिला रखी थी।
    4. 20वीं सदी की शुरुआत होते-होते कानून लागू करने वाली एजेंसियों में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा।
    5. पहचान करने के पारंपरिक तरीकों की तुलना में फिंगरप्रिंटिंग तकनीकी प्रगति साबित हुई।
    6. आधुनिक समय में फिंगरप्रिंट अपराधियों को पकड़ने-कानूनी सबूत जुटाने का आधार हैं।
      लेकिन जिस प्रकार से उंगली या अंगूठे की छाप का प्रभुत्व बढ़ता जा रहा है उसी प्रकार से कुछ समस्याएं भी सामने आ रही हैं। क्योकि जब हम कोई जमीन की खरीद फरोख्त करते हैं अथव बैंक से कार्य निपटाने होते हैं तो हर मौके पर आधार कार्ड बनवाना हो या ऐसा ही कोई दस्तावेज अंगूठे या उंगली की छाप देनी होती है लेकिन जब कुछ लोगों की अंगलियों की लकीरे ही समाप्त हो जाती है तब परेशानी होती है वह तो अच्छा है कि आंखों की पुतलियों की मान्यता दी गयी है लेकिन इसमें काफी समय और परेशानी होती है क्योंकि सरकारी कार्यालयों में रखे गये अनट्रेंड युवक अपनी अज्ञानता और पूर्ण तजुरबा ना होने के चलते इस कार्य में काफी समय लगाते है मेरा मानना है कि एक तो जहां जहां इनकी आवश्यकता पड़ती है वह प्रशिक्षित युवाओं को रखा जाए और जहां काम की अधिकता हो वहां छाप के लिए कम से कम पांच जगह व्यवस्था हो क्योंकि बुजुर्ग हो या मध्यम दर्जे के लोग इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए वहां खड़े खड़े उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है ऐसा ना हो इसके लिए जिम्मेदार खोजें समाधान।
      (प्रस्तुति -अंकित बिश्नोई राष्ट्रीय महामंत्री सोशल मीडिया एसोसिएशन एसएमए व पूर्व सदस्य मजीठिया बोर्ड यूपी संपादक पत्रकार)
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