किसी भी व्यक्ति को सम्मान मिलना या दूसरे शहर में उसका स्वागत होना उसके परिवार के साथ समाज के लिए गौरव की बात हुआ करती थी। लेकिन अब जबसे धार्मिक स्थानों के चंदे में चोरी और अनेक कमियां उजागर होने लगी हैं तथा आर्थिक अपराधियों का सम्मान बड़े बैनरों द्वारा किया जाने लगा है अथवा टैक्स चोरी व सरकारी जमीनों पर कब्जा कर बेचने अवैध निर्माण को बढ़ावा देने वालों की संस्थानों वीआईपी और जनप्रतिनिधियों के कार्यक्रमों में जाना बढ़ा है तब से सारे सम्मानों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बताते चलें कि पूर्व में किसी भी कार्यक्रम में जाने से से पहले पुलिस प्रशासनिक अफसरों व जनप्रतिनिधयों द्वारा उसकी एलआईयू जांच या सूत्रों से पता किया जाता था कि जहां उन्हें बुलाया जा रहा है वहां सरकारी नीति के खिलाफ तो कुछ नहीं हो रहा। लेकिन अब यह नियम शायद फाइलों में दबकर रह गया और इस तरह के प्रकरण धन कमाने वाले लोगों ने बड़े स्कूल धार्मिक स्थान और संस्थाएं चलानी शुरु कर दी है और इनमें समाज में कुछ करने वाले गरीब बेसहारा लोगों की ओर ध्यान ना देकर विवादित लोगों का सम्मान होने लगा। हैरानी इस बात की है कि आयोजक बड़े अधिकारियों व नेताओं को बुलाते हैं और उनके द्वारा सरकारी नीतियों के खिलाफ काम कर धन्नासेठ बने लोगों को सम्मानित किया जाता है। बाद में यह तथाकथित सम्मान ही अपने समाज और मिलने वालों से डीेंगे हांकते हैँ कि उन्हें फलां व्यक्ति संस्था द्वारा सम्मानित किया गया। कुछ माह पहले एक बीडी व्यापारी को सम्मानित किया गया लेकिन जिस कार्य के लिए उसे सम्मान दिया गया था उससे उसका दूर तक कोई संबंध नहीं था। आज एक खबर पढ़ी कि एक सज्जन जो अपनी काली कमाई या साथियों की ऐसी ही कमाई के दम पर विभिन्न संगठनों और धार्मिक स्थानों में सेंध लगा चुके हैं और शहर के बाहरी स्थान पर बने एक संस्थान में घुसपैठ कर चुके हैं ने अपने हुए सम्मान कोअपने लिए गर्व का पल बताया। लेकिन इससे आगे यह शब्द अजीब लगे कि शहर के लिए अध्यात्मिक और सामाजिक क्षेत्र में मिले सम्मान से वह मेरठ के लिए गौरव का क्षण बन गया। सवाल यह उठता है कि सरकारी भूमि घेरकर और अवैध निर्माण कर धनवान बने व्यक्ति का सम्मान आखिर मेरठ का सम्मान कैसे हो गया। अगर यह किसी भी क्षेत्र में काम करने वाले ईमानदार व्यक्ति को मिलता तो यह कहा जा सकता था कि यह अपने शहर के लिए सम्मान की बात है। मेरा मानना है कि ऐसे सम्मानों और गलत पैसे से बने संस्थानों में वीआईपी के जाने से आर्थिक अपराधियों काबोलबाला बढ़ रहा है और समाज के लिए कुछ करने वालों को साइडलाइन किया जा रहा है जो सही नहीं है। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ कह रहे हैं कि समाज के लिए कुछ करने वालों को बढावा दिया जाए और आर्थिक अपराधियों को कानून के दायरे में लाकर कार्रवाई की जाए मगर यहां कुछ करने के लिए सक्षम लोगों द्वारा जिस प्रकार लापरवाही का चोला ओढ़ लिया गया है वो चर्चा का विषय है। अब स्थिति यह हो गई है नागरिकों के अनुसार आर्थिक अपराधी और भूमाफिया विधानसभा और लोकसभा के लिए टिकट मांगने वालों की लाइन में चाटुकारों की वजह से चर्चित हो रहे हैं। सवाल उठता है कि महाराजा अग्रसैन राम मनोहर लोहिया मदन मोहन मालवीय जैसे साधु पुरुषों ने जो सिद्धांत तय किए थे वो काली कमाई करने वालों को सम्मान देने की भेंट चढ़ते रहेंगे।
(प्रस्तुतिः- रवि कुमार बिश्नोई संपादक दैनिक केसर खुशबू टाइम्स मेरठ)
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