सरधना 28 जुलाई (प्र)। जिन टीचरों के भरोसे सीएम योगी सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने व बच्चों का भविष्य बेहतर बनाना चाहते हैं, उन टीचरों की कार्यप्रणाली देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे। यूं तो सरकारी स्कूलों में टीचरों के रेगुलर न आने और न पढ़ाने का आरोप लगता रहा है। सरकारी विद्यालयों में व्यवस्था राम भरोसे चल रही है।
सरधना बहादरपुर गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक एक मासूम को क्लास में बंद कर चले गए। मासूम बच्ची कई घंटे तक बंद क्लास में तड़पती रही। वहां से गुजर रहे ग्रामीणों ने बच्ची के रोने की आवाज सुनी को मामले का पता चला। इसके बाद किसी तरह ताला तोड़कर बच्ची को बाहर निकाला गया। घटना से नाराज ग्रामीण सोमवार को विद्यालय परिसर में धरने पर बैठ गए। उन्होंने शिक्षकों पर लापरवाही जैसे गंभीर आरोप लगाए। कई घंटे चले हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद शिक्षकों ने अपनी गलती मानी तो मामला निपटा।
सरधना के बहादरपुर गांव में प्राथमिक विद्यालय नंबर-1 में व्यवस्था बिगड़ी पड़ी है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षक बच्चों को ठीक नहीं पढ़ा रहे हैं। इतना ही नहीं विद्यालय देर से आते हैं और जल्दी अपने घर निकल जाते हैं। बीते शनिवार को शिक्षकों ने बच्चों की समय से पहले छुट्टी कर दी और जल्दी जल्दी क्लास में ताले लगाकर फरार हो गए। किसी ने क्लास चेक करना जरूरी नहीं समझा। कक्षा तीन में पढ़ने वाली मासूम रश्मि पुत्री संजय क्लास में रह गई। शिक्षक ने जांचे बिना ही ताला ठोक दिया। जिसके चलते मासूम बच्ची कई घंटे तक बंद क्लास में तड़पती रही। कई घंटे बाद कुछ ग्रामीण विद्यालय की ओर से गुजरे तो बच्चे के रोने की आवाज सुनी। ग्रामीण विद्यालय में गए तो मामले का पता चला। ग्रामीणों ने किसी तरह ताला तोड़कर बच्चे को बाहर निकाला।
घटना से नाराज ग्रामीण सोमवार को विद्यालय परिसर में धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों ने शिक्षकों पर लापरवाही जैसे गंभीर आरोप लगाए। कई घंटे तक हाई वोल्टेज ड्रामा चला। बाद में शिक्षक ने लिखित में अपनी गलती मानते हुए माफी मांगी। साथ ही सभी शिक्षकों ने भविष्य में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं करने का विश्वास दिलाया। इसके बाद ग्रामीण शांत हुए और वापस लौटे। इस संबंध में एबीएसए सुदर्शनलाल से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इस मौके पर देशपाल हुड्डा, प्रदीप हुड्डा, अजय चेयरमैन, धीरेंद्र, कपिल सेंगर आदि मौजूद रहे।
चार साल में दूसरा मामला
ग्रामीणों के अनुसार चार साल पहले ही विद्यालय में एक छात्र कक्षा में ही रह गया था उस दौरान मामला मौखिक रूप से स्टाफ द्वारा माफी मांगने पर निपटाया गया था। अब फिर से दोबारा होने पर ग्रामीणों में शिक्षकों की कार्यशैली के खिलाफ आक्रोश है। हालांकि प्रधानाध्यापक राजीव कुमार का कहना है कि उस दौरान घटना वाले दिन विद्यालय में नहीं थे।
तीन घंटे बाद पता चला मासूम बेटी का
संजय ने बताया कि जब रश्मि का पता नहीं चला। इस पर उसकी बड़ी बेटी लक्की ने विद्यालय में देखने की बात कही। जिस पर वह और अन्य ग्रामीण लक्की के पीछे विद्यालय की तरफ दौड़ पड़े। रोने की आवाज आने पर करीब पांच बजे रश्मि को कक्षा से बाहर निकाला।

