कुरनूल 23 जुलाई। नियति के खेल और समय के चक्र को बयां करती एक भावुक कर देने वाली घटना आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले से सामने आई है. यहां 1996 में 10वीं की परीक्षा में असफल होने पर परिजनों की डांट के डर से घर छोड़कर भागा एक युवक 30 साल बाद वापस अपने माता-पिता के पास लौट आया. तीन दशकों से बेटे के इंतजार में बूढ़े हो चुके माता-पिता जब अपने बेटे से मिले, तो पूरा माहौल खुशी के आंसुओं से सराबोर हो गया. इस अटूट मिलन का जरिया बना निर्वाचन आयोग का एक आधिकारिक एसआईआर फॉर्म.
जानकारी के मुताबिक, कुरनूल जिले के एम्मिगनूर निवासी येल्लम्मा और येल्लप्पा दंपति के दो बेटे और तीन बेटियां हैं. साल 1996 में उनका बड़ा बेटा रामा 10वीं की परीक्षा में अनुत्तीर्ण (फेल) हो गया था. उसी दौरान उसके ताऊ का बेटा नागराजू भी फेल हो गया था. माता-पिता और परिजनों की डांट के डर से दोनों किशोरों ने घर छोड़ने का जल्दबाजी में फैसला कर लिया.
घटना के 6 साल बाद नागराजू तो अपने घर लौट आया, लेकिन रामा डर के मारे दूर ही रहा. उसने मुंबई, पुणे और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में घूम-घूमकर मजदूरी और कड़ी मेहनत की.
घर से दूर रहकर रामा ने अपने जीवन को दोबारा पटरी पर लाया. बेंगलुरु पहुचकर रामा ने कड़ी मेहनत की और अपने पैरों पर खड़ा हुआ. उसने विवाह किया और उसका एक खुशहाल परिवार भी बस गया. जीवन में पूरी तरह सेटल हो जाने के बाद भी रामा के मन में अपने गांव, बूढ़े माता-पिता और भाई-बहनों की यादें हमेशा बनी रहती थीं, लेकिन बचपन में की गई गलती के कारण उसमें अपने गृहनगर लौटने का साहस नहीं जुटा पा रहा था.
30 साल बाद इस कहानी में वो मोड़ आया जिसने बिछड़े हुए परिवार को मिला दिया. हाल ही में एक आधिकारिक प्रक्रिया के तहत रामा को चुनाव आयोग का एसआईआर आवेदन पत्र भरना पड़ा. इस फॉर्म में माता-पिता का पूरा नाम और मूल गृहनगर का स्थायी पता दर्ज करना अनिवार्य था. अपने माता-पिता का नाम और गांव का पता लिखते ही रामा का दिल पसीज गया और उसने तय कर लिया कि अब चाहे जो हो, उसे अपने माता-पिता से मिलना ही होगा.
तीन दशकों के लंबे अंतराल के बाद जब रामा ने अपनी जन्मभूमि एम्मिगनूर में कदम रखा, तो नजारा भावुक कर देने वाला था. घर पहुंचते ही जब उसने अपने बूढ़े हो चुके माता-पिता को देखा, तो दोनों पक्षों के सब्र का बांध टूट गया. 30 साल से जिस बेटे को माता-पिता मृत या गुमशुदा मान चुके थे, उसे सही-सलामत अपने सामने पाकर परिजनों की आंखों में असीम आनंद के आंसू थे.

